क्या परवेज़ मुशर्रफ़ की मौत की सजा को लाहौर हाई कोर्ट ने खारिज़ कर दिया?

क्या परवेज़ मुशर्रफ़ की मौत की सजा को लाहौर हाई कोर्ट ने खारिज़ कर दिया?

लाहौर हाई कोर्ट ने परवेज मुशर्रफ की मौत की सजा खारिज कर दी है। हाई कोर्ट ने पूर्व तानाशाह राष्ट्रपति के खिलाफ चली पूरी न्यायिक प्रक्रिया को ही असंवैधानिक करार दिया है।

 

डी डब्ल्यू पर छपी खबर के अनुसार, लाहौर हाई कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने पूर्व आर्मी चीफ और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाने की पूरी प्रक्रिया को ही असंवैधानिक करार दिया है।

बेंच ने एकमत से मुशर्रफ के पक्ष में फैसला दिया। 76 साल के मुशर्रफ को 17 दिसंबर 2019 को इस्लामाबाद में एक विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी।

छह साल की सुनवाई के बाद स्पेशल कोर्ट उस नतीजे पर पहुंचा था। लेकिन हाई कोर्ट के ताजा फैसले के साथ ही मौत की सजा का फैसला तुरंत प्रभाव से रद्द हो गया है।

अदालत में सरकार की पैरवी कर रहे एडिशनल अटॉर्नी जनरल इश्तियाक ए खान से हाई कोर्ट ने पूछा कि मुशर्रफ के मामले की जांच के लिए विशेष अदालत का गठन कैसे किया गया? क्या इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी ली गई?

कैबिनेट में इस पर कब चर्चा हुई? सवालों के जवाब में एडिशनल अटॉर्नी जनरल ने कहा, यह सच है कि मुशर्रफ के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट के गठन का फैसला कैबिनेट की अनुमति के बिना हुआ। इन्हीं आधारों पर हाई कोर्ट ने मुशर्रफ की सजा को असंवैधानिक करार दिया।

हाई कोर्ट ने यह भी माना कि, “आपातकाल भी संविधान का ही हिस्सा है।” बेंच में शामिल जस्टिस नकवी ने सरकार से पूछा कि, अगर ऐसी स्थिति हो कि सरकार को इमरजेंसी लगानी पड़े तो क्या सरकार के खिलाफ भी राजद्रोह का मुकदमा दायर करना चाहिए।

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए एडिशनल अटॉर्नी जनरल इश्तियाक ए खान ने कहा, शिकायत दर्ज करना, कोर्ट का गठन करना, अभियोजन पक्ष का चुनाव करना, गैरकानूनी हैै। इसे गैरकानूनी घोषित किया जाता है। और इसके साथ ही पूरा फैसला ही किनारे किया जाता है।

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