Tuesday , September 25 2018

पीरजादा की काबिलियत और रमेश कुमार के जुनून ने कठुवा गैंगरेप का खुलासा किया

कठुआ रेप केस में दिल दहलाने देने वाली जानकारियां सामने आने के बाद पूरा देश गुस्से में है। इस अमानवीय और क्रूरता की सीमाएं लांघने वाले अपराध का खुलासा करने वाले दो शख्स हैं। जिन्हें इस मामले की जांच के दौरान बेशुमार दुश्वारियों,धमकियों और सांप्रदायिक नफरत का शिकार होना पड़ा।

सबसे पहले नाम आता है जम्मू में क्राईम ब्रांच के एसएसपी रमेश कुमार जल्ला का। एसएसपी जल्ला की टीम ने जो निष्कर्ष निकाला उसके मुताबिक पीड़ित बच्ची को कठुआ जिले में एक मंदिर में अगवा करके रखा गया था, उसके साथ लगातार बलात्कार किया गया, उसे यातनाएं दी गईं और आखिरकार उसकी हत्या कर दी गई।

रमेश कुमार जल्ला ने इस पूरे मामले की जांच रिकॉर्ड समय में पूरी की और हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित 90 दिन की समयसीमा पूरी होने से 10 दिन पहले ही 9 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल कर दी। उन्हें इस दौरान विभिन्न गुटों के विरोध का सामना करना पड़ा।

चार्जशीट में चार पुलिस वालों और एक रिटायर्ड सरकारी अफसर को आरोपी बनाया गया है। आरोप पत्र के मुताबिक यही रिटायर्ड सरकारी अफसर ही इस जघन्य अपराध का मास्टरमाइंड था। इस अपराध के पीछे मंशा जम्मू-कश्मीर के खानाबदोश समुदाय बकरवाल को हिंदू बहुल इलाकों से भगाना था और उन्हें भयभीत करना था।

रमेश कुमार जल्ला की अगुवाई में एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी इस मामले की जांच में जुटा था। जल्ला ने इस एसआईटी के नेतृत्व की जिम्मेदारी एक शानदार ट्रैक रिकॉर्ड वाले और मुश्किल से मुश्किल केस हल करने में माहिर माने जाने वाले एक युवा पुलिस अफसर नवीद पीरजादा को दी थी।

आरोपी वैसे तो पुलिस की पकड़ में आ गए थे। लेकिन उन्होंने न तो अपनी जुबान खोली थी और न ही स्थानीय पुलिस की भूमिका के बारे में कुछ कहा था। बल्कि उन्होंने तो यह कहकर जांच भटकाने की कोशिश की थी कि एक स्थानीय लड़के ने महज बचपने में यह अपराध अंजाम दे दिया।

रमेश जल्ला और नवीद पीरजादा की टीम ने बच्ची के शव की तस्वीरों की गहराई से जांच की और पाया कि शव पर कीचड़ लगी हुई है। लेकिन जो कीचड़ शव पर लगी थी, वह उस जगह की मिट्टी से बिल्कुल अलग थी जहां बच्ची का शव बरामद हुआ था। इससे यह तय हुआ कि उसकी हत्या कहीं और की गई। लेकिन कहां, यह एक कठिन प्रश्न था।

एसआईटी ने रिकॉर्ड्स में से शव की और तस्वीरें हासिल कीं। लेकिन यह देखकर एसआईटी चौंक गई कि उन तस्वीरों में शव पर कीचड़ थी ही नहीं। इससे टीम को शक हुआ कि हो न हो, पुलिस विभाग में कोई है जो इस मामले में सबूतों से छेड़छाड़ कर रहा है। अंतत: यह सामने आया कि सबूत छिपाने के लिए बच्ची के कपड़े धो दिए गए थे।

पुलिस ने इस केस के मास्टरमाइंड रिटायर्ड सरकारी अफसर सांजी राम को आठ लोगों के साथ गिरफ्तार किया। इनमें उसका बेटा विशाल जंगोतरा और एक अव्यस्क भतीजा भी शामिल है। शुरु में इसी भतीजे को हाथों हुआ अपराध बताया गया था। लेकिन इस केस में कुदरत और दैवीय शक्तियां भी पीड़िता के साथ थीं।

पहली बार मंदिर जाने पर टीम को कुछ हाथ नहीं लगा जिससे साबित होता कि बच्ची को वहां रखा गया था। लेकिन फिर एक कमरा दिखा जिस पर ताला लगा था। इसकी चाबियां सांजी राम के पास थीं। इस कमरे से बालों का गुच्छा मिला। इन बालों को डीएनए जांच के लिए भेजा गया। इसमें से एक बाल का पीड़िता के डीएनए से मिलान हो गया।

इस मामले में आखिरकार एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया और सुरिंदर कुमार, सहायक सब इंस्पेक्टक आनंद दत्ता, हेड कांस्टेबिल तिलकराद और परवेश कुमार के अलावा एक स्थानीय बाशिंदे को भी गिरफ्तार किया गया। इन लोगों पर सबूत मिटाने और बच्ची के कपड़े धोने का आरोप है। चार्जशीट के मुताबिक इन लोगों ने स्थानीय पुलिस को डेढ़ लाख रुपए देकर अपराध छिपाने में मदद की।

(साभार- नवजीवन)

TOPPOPULARRECENT