कमलेश तिवारी के परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से किया इंकार!

कमलेश तिवारी के परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से किया इंकार!

लखनऊ में हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की दिनदहाड़े हत्या से बवाल मचा है। आरोपियों की पहचान अब तक नहीं हो पाई। वहीं अब एक नया सीसीटीवी ​फुटेज सामने आया है जिसमें आरोपियों के साथ एक महिला भी दिख रही है।

परिवार ने सरकार से 5 करोड़ का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग की है। परिवार का कहन है कि जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती वो अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। शुक्रवार का पूरा दिन गुजर गया लेकिन हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिला।

पुलिस ये मानकार बैठी थी कि हत्या के पीछे दो लोगों की साजिश है लेकिन एक सीसीटीवी वीडियो ने इस थ्योरी को पलट कर रख दिया है। इस वीडियो में एक महिला भी नजर आ रही है, उसी भगवा वेश में और सफेद रंग का दुपट्टा।

कहा जा रहा है कि ये वीडियो खुर्शीदबाग इलाके का ही है। इस वीडियो में वो दोनों आरोपी भी नजर आ रहे हैं जिनके बारे में कहा जा रहा है कि कमलेश तिवारी के साथ 36 मिनट तक बातचीत करते रहे, चाय-नाश्ता करते रहे और फिर मौका देखकर हत्या करके फरार हो गए।

कल तक पुलिस को सिर्फ दो लोगों की तलाश थी, अब पुलिस को इस महिला की भी तलाश है। केंद्र ने राज्य सरकार से अलग रिपोर्ट मांगा है और राज्य सरकार ने राज्य पुलिस से। कमलेश तिवारी हत्याकांड का सच पता करने के लिए पुलिस ने SIT टीम गठित की है। इस टीम में आईजी लखनऊ एसके भगत, लखनऊ के एसपी क्राइम दिनेश पूरी और एसटीएफ के डिप्टी एसपी पी के मिश्रा हैं।

परिवार इंसाफ मांग रहा है, हत्यारे का नाम पता भी बता रहा है। कमलेश तिवारी की पत्नी किरण तिवारी की शिकायत पत्र में बिजनौर के दो मौलानाओं का जिक्र है जिनके नाम नसीम क़ासमी और अनवारुलहक़ हैं। दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है लेकिन जब तलाशी शुरू हुई तो दोनों लापता हैं। 2015 में अनवारुलहक़ ने कमलेश तिवारी का सिर कलम करने वालों को 51 लाख के इनाम का ऐलान किया था।

कमलेश पहले हिन्दू महासभा में बड़े पद पर थे। कुछ महीने पहले इन्होंने अपनी पार्टी बनाई। लखनऊ में हजारों की संख्या में कमलेश तिवारी को जानने वाले हैं और जब पता चला कि उनकी हत्या हो गई है तो सब गुस्से से आग-बबूला हो गए।

इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम के अनुसार, परिवार का गुस्सा आधी रात को उस वक्त और बढ़ गया जब पांच घंटे हो गए थे और शव परिवार वालों को सौंपा नहीं जा रहा था। यूपी के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा परिवार वालों से मिलने आए थे लेकिन लोगों का गुस्सा इतना ज्यादा था कि उन्हें दरवाजे पर पहुंचने तक नहीं दिया गया।

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