Monday , July 23 2018

तीन तलाक़ बिल के खिलाफ मुहिम तेज, देश भर की महिलाओं ने संसद भवन घेराव का ऐलान किया

केंद्र की सरकार ने भारतीय मुसलमानों की पहचान और ईमान व वजूद पर हर दिन एक नए तरीके से हमला कर रही है। हाल ही में 28 जनवरी को संसद के दोनों सदनों के संयुक्त बैठक में सम्बोधन के दौरान सरकार ने राष्ट्रपति से भी कहलवा दिया कि कई दशकों से मुस्लिम महिलाओं की इज्जत राजनितिक फायदों के लिए दांव पर लगा दिया गया है। मेरी सरकार ने तीन तलाक़ बिल को संसद में पेश कर दिया है। मुझे उम्मीद है कि यह कानून मुस्लिम बहनों और बच्चों सम्मान और इज्जत के साथ जीने लायक बनाएगा।

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लेकिन राष्ट्रपति के इस बयान को मुस्लिम महिलाओं ने उसी वक्त ख़ारिज कर दिया और इस बिल के उच्च सदनों में पेश होने के बाद से महिलाओं ने इसे शरीअत के खिलाफ करार देते हुए देशभर में अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है।

बहरेहाल अब देश की राजधानी में एक बड़े प्रदर्शन की तैयारी है जिसके तहत महिलाएं मौन प्रदर्शन के साथ संसद का घेराव करेगी। कल देश की राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन के एक स्कूल में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी की निर्देशानुसार संसद में पेश तीन तलाक़ बिल के खिलाफ महिलाओं की आंदोलन की समर्थन में दिल्ली के वरिष्ठ मजहबी नेताओं, मस्जिदों के इमाम, एवं जानकारों का एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई।

इस मौके पर बताया गया कि एक तरफ जहां मोदी सरकार इस बिल को मुस्लिम महिलाओं के फायदे और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में अच्छा कदम बता रही है तो वहीँ खुद महिलाओं ने प्रस्तावित बिल को शरीअत के खिलाफ बताया है, और वह इसके खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रही है।

इस महत्वपूर्ण सभा में यह फैसला लिया गया है कि अगले महीने महिलाएं तीन तलाक बिल के खिलाफ संसद का घेराव करेगी। इस दौरान बड़ी तादाद में महिलाएं जमा होकर मौन प्रदर्शन के जरिये इस बिल को रद्द करने की मांग करेगी।

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