Saturday , August 18 2018

पेट्रोल-डीजल होंगे और महंगे, मोदी सरकार ड्यूटी कम करने को तैयार नहीं

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भले ही कई महीनों से बीते कई सालों के उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं, लेकिन इससे जल्दी राहत मिलने के आसार भी नहीं दिखते। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑइल की कीमतों में तेज इजाफा जारी है तो दूसरी ओर सरकार की ओर से भी इस पर कोई राहत देने के संकेत नहीं मिलते। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को इस बात के संकेत दिए कि वह फिलहाल डीजल और पेट्रोल पर ड्यूटी कम करने नहीं जा रही है।

ऐसे में इंटरनैशनल मार्केट में बढ़ती कीमतों को देखते हुए भारत में अभी और इजाफा जारी रहने की आशंका है। रविवार को पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 30 पैसे की बढ़त के साथ 75.91 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। इसके अलावा डीजल की कीमत भी 23 पैसे के इजाफे के साथ 67.31 के स्तर पर आ गई है। डीजल की कीमत में करीब एक सप्ताह से डेढ़ रुपये और पेट्रोल की कीमत में 1 रुपये 11 पैसे का इजाफा हो गया है।

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने पत्रकारों से कहा, ‘यदि इंटरनैशन मार्केट में कीमतों में इजाफा होता है तो निश्चित तौर पर इंपोर्ट बिल पर भी इसका असर पड़ेगा। अलग-अलग परिस्थितियों में हमने देखा है कि पेट्रोल और डीजल का इंपोर्ट बिल 25 अरब डॉलर से लेकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचा है। असल में यह तेल की खरीद ही है, जिसका भारत के चालू खाता घाटे पर सीधा असर पड़ता है।’ उपभोक्ताओं पर बढ़ी कीमतों का असर पड़ने और सरकार के समक्ष राजस्व जुटाने के अन्य विकल्पों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में गर्ग ने कहा, ‘तेल कीमतों में इजाफे से सरकार के राजस्व कलेक्शन पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता है। हालांकि सरकार को कई तरह की ड्यूटीज में अजस्टमेंट जरूर करना पड़ता है।’

100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचेगा कच्चा तेल!
गौरतलब है कि बीते करीब तीन दिनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई। एक अमेरिकी बैंक ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा था कि अगले साल तक यह कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अकसर विपक्ष और जनता की ओर से सरकार से एक्साइज और कस्टम ड्यूटी कम किए जाने की मांग की जाती रही है।

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