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ब्लाइंड स्कूल में लेड टाइप फॉन्ट का इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कोलकाता हाई कोर्ट में अरज़ी

ब्लाइंड स्कूलों में ब्रेल लिपि की जगह लेड टाइप फॉन्ट के इस्तेमाल को रोकने के लिए पीआईएल दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन लेड टाइप फॉन्ट में अधिक मात्रा में सीसा (लेड) मिले होने की वजह से यह बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है और उन्हें गंभीर बीमारी हो सकती है।

बता दें कि ब्लाइंड स्कूलों में एआर डिवाइस का इस्तेमाल गणित जैसे विषयों के अभ्यास के लिए किया जाता है। इन डिवाइसों के फ्रेम में कैल्कुलेशन के लिए मेटल के टाइप फॉन्ट इस्तेमाल किए जाते हैं।मेटालिक टाइप फॉन्ट को नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ विजुअली हैंडीकैप (एनआईवीएच) द्वारा बांटा जाता है।

हावड़ा जिले के स्ग्निधा आचार्य ने इसके खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट में पीआईएल दायर की है। इस मामले में डिविजन बेंच में शुक्रवार को सुनवाई होनी है।

स्निग्धा खुद भी ब्लाइंड स्कूल की स्टूडेंट रह चुकी हैं। स्निग्धा अपने स्कूल समय को याद करते हुए कहती हैं कि कैसे उन्हें गणित के लिए इन लेड टाइप फॉन्ट का इस्तेमाल करना पड़ता था। स्निग्धा बताती हैं, ‘गणित के सवालों को हल करने के लिए हम उन टाइप फॉन्ट्स को लंबे समय तक इस्तेमाल करते थे, कभी कभार फॉन्ट्स फ्रेम में फंस जाते थे जिस वजह से उसे दांत से खींचकर हटाना पड़ता था। इस तरह लेड शरीर के अंदर प्रवेश करके बीमार बना सकते हैं।’

स्निग्धा इस समय पब्लिक हेल्थकेयर ऐंड मेडिसिन लॉ की स्टूडेंट हैं। एक प्रॉजेक्ट के तहत 125 छात्रों पर रिसर्च के तहत उन्हें मालूम चला कि इन टाइप फॉन्ट में 98.11 फीसदी मात्रा में लेड होता है। इससे प्रभावित 65 बच्चों को भूख न लगने और नींद न आने की बीमारी है।

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