Wednesday , January 17 2018

कथित आतंकी सैफुल्लाह से सुबह ही पूछताछ कर चुकी थी पुलिस, ID देखा था और मकान में भी आई थी

लखनऊ: ठाकुरगंज इलाके में मंगलवार देर रात संदिग्ध आतंकियों को मार गिराने के बाद एटीएस का ऑपरेशन खत्म हो गया। लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस अगर पहले से सतर्क होती तो ऑपरेशन से पांच घंटे पहले ही संदिग्धों को दबोचा जा सकता था।

दरअसल, जिस मकान में एटीएस ने यह ऑपरेशन किया है उसके दूसरे किरायेदार अब्दुल कय्यूम और उसके बेटे के बीच झगड़े की सुचना पर पुलिस घटना के पांच घंटा पहले ही आई थी। पुलिस ने यहां आकर पिता और पुत्र के बीच पंचायत की थी और मामले को शांत कराया था। इतना ही नहीं पुसिस ने जाते-जाते दूसरे किरायेदार के कमरे में भी झांक-झांककर देखा था और वहां मौजूद दोनों संदिग्ध आरोपियों से भी पूछताछ की थी।

दूसरे किरायेदारों का कहना है कि पुलिस ने उनकी आईडी भी देखी थी। कय्यूम ने बताया कि सुबह साढ़े नौ बजे बेटे से एक बात को लेकर उनका और उनके बेटे की बीच झगड़ा हो गया था। इसके लेकर उन्होंने पुलिस कंट्रोलरूप को फोन किया। कुछ देर बाद ही पीआरसी मौके पर पहुंच गई। यहां तक की काकोरी थाने से एक दारोगा और सिपाही भी आ गए।

कय्यूम ने बताया कि पुलिसकर्मी उनके घर के अंदर आए और उनके बेटे की बात को सुनकर झगड़े को शांत कराया। तकरीबन पुलिस एक घंटे तक मकान में रही। इस दौरान संदिग्ध भी वहां मौजूद थे।

पुलिस ने जाते वक्त सभी कमरों में झांकर देखा। संदिग्धों से पूछा कि वह कहां रहते हैं। दोनों ने कानपुर में रहने की जानकारी दी। पुलिस ने आईडी मांगी जो कि कय्यूम के पास ही थी उसने दिखा दिया। फिर पुलिस आईडी देखकर वहां से चली गई।

पुलिस के मकान से निकलने पांच घंटे बाद ही एटीएस ऑपरेशन करने आ गई। अगर पुलिस संदिग्ध के कमरे की तलाशी ले लेती तो शायद असलहे मिल जाते और उन्हें आराम से पकड़ लिया जाता।

 

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