प्रशांत किशोर की ‘मिशन 2019’ के लिए ‘टीम मोदी’ में वापसी?

प्रशांत किशोर की ‘मिशन 2019’ के लिए ‘टीम मोदी’ में वापसी?
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चुनावी रणनीतिकार के तौर पर लगता है कि प्रशांत किशोर ने साल 2019 के महामुकाबले से पहले ‘घर वापसी’ का मन बना लिया है। भाजपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक किशोर ठीक वहीं पहुंचते लगते हैं जहां से छह साल पहले उन्होंने शुरुआत की थी।

आजतक की खबर के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व हेल्थ स्पेशलिस्ट किशोर 2014 की तरह ही 2019 कैम्पेन के लिए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह देते नजर आ सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में किशोर की प्रधानमंत्री के साथ कई मुलाकात हो चुकी हैं, अगले साल के आम चुनाव के लिए फॉरवर्ड प्लानिंग बनाने के लिए किशोर की प्रधानमंत्री के साथ कुछ मुलाकात निर्धारित समय से भी कहीं ज्यादा देर तक चलीं।

किशोर ने बीजेपी को युवा वर्ग का समर्थन जुटाने पर खास जोर देने की सलाह दी है। किशोर का मानना है कि 2014 से पहले युवाओं को साथ जोड़ने के लिए जितनी मेहनत की गई थी, वैसा ही मजबूत कनेक्ट अब किए जाने की आवश्यकता है।

चुनावी रणनीतिकार किशोर ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ अतीत के कथित मतभेदों को भी भुला दिया लगता है। सूत्रों के मुताबिक किशोर की शाह के साथ भी उनके घर पर कई बैठकें हुई हैं।

एक इनसाइडर का कहना है, ‘अगर इन दोनों ने हमेशा के लिए कभी साथ काम नहीं करने का फैसला लिया होता तो वे कई मौकों पर ऐसे साथ लंच और डिनर नहीं कर रहे होते। अगर प्रधानमंत्री कहते हैं कि सभी को मिल कर काम करना होगा तो कोई भी प्रधानमंत्री की सलाह से अलग नहीं जा सकता’।

2014 के आम चुनाव के बाद किशोर ने पार्टी में किसी ऊंचे ओहदे की मांग की थी जिसके लिए अमित शाह ने इनकार कर दिया था. इसके बाद दोनों के रिश्तों में तल्खी आ गई और किशोर ने भाजपा के धुर विरोधियों से रणनीतिकार के तौर पर हाथ मिला लिया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार, किशोर को साफ कर दिया गया है कि उनका भाजपा के साथ रिश्ता 2019 चुनाव तक रहेगा।

किशोर बिहार में जेडीयू और कांग्रेस के लिए पंजाब में रणनीतिकार के तौर पर काम कर चुके हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए संभावनाएं मजबूत करने की कोशिश में रणनीतिकार के तौर पर किशोर नाकाम रहे।

किशोर के एक सहयोगी का कहना है, ‘अगर कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को यूपी में मुख्यमंत्री के लिए अपने चेहरे के तौर पर पेश करने की सलाह को मान लिया होता तो मुस्लिम एकमुश्त कांग्रेस की ओर लौट सकते थे और वो चुनाव जीत सकते थे’।

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