सज़ा ऐसी दी जाए जिसे देखने वालों की रूह कांप जाए, फिर न कोई निर्भया किसी दरिंदे का शिकार बनेगी न ही ज़ैनब

सज़ा ऐसी दी जाए जिसे देखने वालों की रूह कांप जाए, फिर न कोई निर्भया किसी दरिंदे का शिकार बनेगी न ही ज़ैनब

7 साला ज़ैनब अल्लाह का कलाम यानी कुरान मजीद पढने घर से बाहर निकली थी। रस्ते में एक शैतान मिलता है और उसे बहला फुसला कर पाने साथ ले जाता है। उस मासूम के साथ अपनी हवस की आग बुझाता है। उसकी हत्या कर दी जाती है और उसके मृत शरीर को एक मील दूर एक कचरे के ढेर पर फेंक देता है।

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ज़ैनब के माता पिता उससे दूर हैं। वह उमरा करने सउदी अरब गए हुए हैं वह काबा और मस्जिदे नबवी में अपनी लाडली बेटी के लिये दुआएं करते हैं। वह अल्लाह से उसकी खैर चाहते हैं। लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि वह जिस के लये दुआ कर रहे अहिं वह अब इस दुनियां में नहीं है। इस्लाम ने जुर्मों के खिलाफ सजाओं का जो सिस्टम तय किया है उसे आज का तथाकथित समृद्ध समाज सख्त कह कर रद्द करता है लेकिन सच्चाई यही है कि जबतक मुजरिमों को सख्त से सख्त सजाएं नहीं दी जाएगी उनके हौसले नहीं टूटेंगे।

जो लोग इस्लामी सजाओं की यह कहकर विरोध करते हैं कि वह वहशी सजाएं हैं वही लोग मुजरिमों के खिलाफ बेहद सख्त सजाओं का मांग भी करते हैं। इस्लाम ने बलात्कार की दो सजाएं तय की हैं। अगर मुजरिम कुंवारा है तो उसे 100 कोड़े मारे जाते हैं और अगर शादीशुदा है तो उसे रजम (शरीर जमीन में गाड़ कर पत्थर मारा जाता है) कर दिया जाता है।

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