Friday , August 17 2018

मॉब लिंचिंग पर सरकार सख्त, मंत्रिसमूह और कमेटी का गठन, 15 दिन में देगी रिपोर्ट

लगातार बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर सरकार ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है. अलवर मॉब लिंचिंग मामले में राजस्थान सरकार से रिपोर्ट तलब करने के बाद केंद्र सरकार ने इस मामले में मंत्रिसमूह और एक कमेटी का गठन किया है. कमेटी से 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है. पिछले कुछ महीनों में लगातार बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं के मद्देनजप सरकार ने ये कदम उठाया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी ऐसी घटनाओं पर चिंता जताते हुए सख्त कानून बनाने की सिफारिश कर चुका है.

मॉब लिंचिंग पर कमेटी- राजनाथ

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज लोकसभा में बताया कि देशभर में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या के मामलों पर रिपोर्ट देने के लिए सरकार ने एक मंत्रिसमूह का गठन किया है और गृह सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया है जो 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी. सिंह ने आज सदन में अपनी ओर से दिए गए बयान में कहा कि देशभर में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या के मामलों पर संसद में चिंता व्यक्त की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में अपनी टिप्पणी की है और सरकार से पहल करने की अपेक्षा की है.

 

उन्होंने बताया कि इस संबंध में गृह सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है जो 15 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी. गृह मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उनकी अगुवाई में एक मंत्रिसमूह (जीओएम) भी बनाया गया है जो जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट देगा.

भीड़ द्वारा हत्याओं का सिलसिला

देशभर में पिछले दिनों सामने आए भीड़ द्वारा हत्या के मामलों की पृष्ठभूमि में सरकार ने यह कार्रवाई की है. गत गुरूवार को सिंह ने सदन में कहा था कि यह सच्चाई है कि कई प्रदेशों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं घटी हैं. इसमें कई लोगों की जानें भी गई है. लेकिन ऐसी बात नहीं है कि इस तरह की घटनाएं पिछले कुछ सालों में ही हुई हैं. पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं. लेकिन ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं.

 

उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग में लोग मारे गए हैं, हत्या हुई और लोग घायल हुए हैं, जो किसी भी सरकार के लिए सही नहीं है. हम ऐसी घटनाओं की पूरी तरह से निंदा करते हैं. के. सी. वेणुगोपाल की ओर से शून्यकाल में इस विषय को उठाया गया था. जिस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में केंद्र सरकार भी चुप नहीं है. इससे पहले भी साल 2016 में परामर्श जारी किया था और जुलाई के पहले सप्ताह में भी परामर्श जारी किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने भी की सिफारिश

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने भी संसद से मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाने की सिफारिश की है. लगातार बढ़ रहे ऐसे मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी. हालिया समय में मॉब लिंचिंग के मामले सामने आए हैं. दो दिन पहले ही अलवर में गोमांस तस्करी के शक में रकबर नाम के युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. इसी तरह हालिया समय में  वॉट्सऐप पर फैली बच्चा चोरी की अफवाह में कई लोगों की पीट पीट कर हत्या कर दी गई. ऐसी घटनाएं देशभर में हो रही हैं और सरकार और पुलिस प्रशासन इससे निपटने में नाकाम दिख रही है.

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