तुर्की ने पाला बदला, रुस के साथ जाकर एर्दोगन ने अमेरिका को दिया झटका!

तुर्की ने पाला बदला, रुस के साथ जाकर एर्दोगन ने अमेरिका को दिया झटका!

शायद तुर्क राष्ट्रपति को भी इसका अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि पुतिन के साथ उनकी बातचीत 6 घंटों तक लम्बी खिंचेगी।

पार्स टुडे डॉट कॉम के अनुसार, मंगलवार को जब उत्तरी सीरिया में तुर्की और कुर्द मीलीशियाओं के बीच युद्ध विराम का समय धीरे धीरे अपने अंत को पहुंच रहा था और सीरियाई राष्ट्रपति बशार असद 8 साल बाद इदलिब में जारी लड़ाई के अग्रिम मोर्चे का दौरा कर रहे थे, रूस के शहर सूची में रूसी और तुर्क राष्ट्रपतियों के बीच लम्बी और गहन वार्ता चल रही थी।

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बाहर प्रेस कर रहा था इंतजार
पत्रकारों को इस बैठक के ख़त्म होने और हासिल होने वाले नतीजे का बेसब्री से इंतज़ार था, लेकिन दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष सौदेबाज़ी में कूटनीति के पैंतरे आज़मा रहे थे और अर्दोगान पुतिन से अधिक से अधिक विशिष्टताएं प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन पुतिन भी इस मैदान के मंझे हुए खिलाड़ी की तरह अपने सहयोगी सीरियाई राष्ट्र के हितों के साथ मास्को के हितों पर कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं थे।

ट्रम्प पर विपक्ष कर रहा है हमला
दूसरी ओर, ट्रम्प विरोधी अमरीकी कूटनीतिज्ञ उत्तरी सीरिया से अमरीकी सैनिकों के निकालने और तुर्की और रूस के लिए मैदान ख़ाली कर देने के लिए अपने राष्ट्रपति को कोस रहे थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने यह लिखा
अर्दोगान-पुतिन की मुलाक़ात की रिपोर्टिंग करते हुए न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखाः उनके (पुतिन) लड़ाकू विमान सीरिया के आसमान की निगरानी कर रहे हैं। उनकी सेना ने पूरे सीरिया में अपना सैन्य अभियान फैला दिया है।

वह तुर्की के साथ अपने दोस्ताना रिश्तों को मज़बूत कर रहे हैं। वह और उनके सीरियाई सहयोगी उन इलाक़ों की ओर बढ़ रहे हैं, जो अमरीका ने ख़ाली किए हैं।

अख़बार आगे लिखता हैः इस बैठक के बाद पुतिन की रणनीति और अधिक मज़बूत हुई है। जिसके नतीजे में रूसी और तुर्की सैनिक उत्तरी सीरिया में अमरीका के पुराने सहयोगी कुर्दों के क़ब्ज़े वाले विशाल क्षेत्र पर संयुक्त रूप से निंयत्रण करेंगे। यह घटनाक्रम अमरीका के पूर्व सहयोगियों की क़ीमत पर इलाक़े में रूसी प्रभाव के तेज़ी से विस्तार का कारण बनेगा।

रुस ने भी चालाकी दिखाई
हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान की वह सारी मांगे और इच्छाएं पूरी नहीं हुईं, जिनका उन्होंने सूची जाने से पहले एलान किया था। उदाहरण के तौर पर अर्दोगान चाहते थे कि उत्तरी सीरिया के कूबानी, ऐनुल-अरब, क़ामीशली और मंबिज में उनके सैनिक प्रवेश कर जायें, लेकिन पुतिन ने उनकी इन मांगों को ठुकरा दिया।

क्या हुआ समझौता?
सूची समझौते में सीरिया की अखंडता व राष्ट्रीय एकता और तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा पर बल दिया गया है। इसके अलावा, सीरिया में आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखने और अलगाववादी सोच को असफल बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है।

इसी प्रकार, तल-अबयज़ और रासुल-ऐन के बीच 32 किलोमीटर के इलाक़े पर आधारित सुरक्षित क्षेत्र के निर्माण की तुर्की की मांग को स्वीकार किया गया है। अंकारा और दमिश्क़ के बीच हुए अदाना समझौते के महत्व और उसके सम्मान पर बल दिया गया है, जिससे सूची समझौते को लागू करने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों ने यह राय दी
सीरिया मामलों में अमरीका के विशेष दूत जेम्स जफ़री ने सूची समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अर्दोगान, रूस से कोई ख़ास विशिष्टता हासिल नहीं कर सके, जो विशिष्टताएं उन्होंने अमरीका से हासिल कर रखी थीं, वह इससे कहीं अधिक थीं।

तुर्की ने अपने इस क़दम से दाइश के ख़िलाफ़ संघर्ष को नुक़सान पहुंचाया है और दुर्भाग्य से रूस और असद सरकार को इस मामले में शामिल कर लिया है।

एर्दोगन को ट्रम्प कन्ट्रोल नहीं कर पाये?
वहीं ट्रम्प की टीम से अलग होने वाले और अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सहयोगी रहे बर्ट मेकगोर्क का कहना है कि ट्रम्प की तुलना में पुतिन ने कहीं अच्छी तरह से अर्दोगान को कंट्रोल किया है।

अमरीकी अधिकारियों की प्रतिक्रियाओं से साफ़ ज़ाहिर है कि अमरीका की पकड़ मध्यपूर्व में कमज़ोर पड़ रही है और रूस और उसके सहोयगियों का प्रभाव दिन ब दिन बढ़ रहा है।

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