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जब राम मंदिर का मामला कोर्ट में है तो, बातचीत करने का लाइसेंस किसने दिया : वृंदा करात

नई दिल्ली : राम मंदिर विवाद को लेकर राजनीति और बयानबाजी दोनों ही लगातार जारी है. श्री रविशंकर कोर्ट के बाहर मसले को हल करने की पुरजोर कोशिश में लगे हैं. रविशंकर 16 नवंबर को अयोध्या जाने की तैयारी में हैं. इसी मुद्दे पर सीपीएम की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने कहा कि जब राम मंदिर का मामला कोर्ट के सामने है और कोर्ट के आधीन है तो कोई भी व्यक्ति स्वयं घोषित करे कि मैं बातचीत कर रहा हूं, किसने उन को कहा या किसने उनको लाइसेंस दिया?

कल कोई भी व्यक्ति खड़े होकर बोले कि हम बातचीत करवाएंगे? इससे कोई फायदा नहीं है और इसकी कोई जरूरत ही नहीं है. जहां तक मेरी और मेरी पार्टी की राय है रविशंकर की मध्यस्थता का कोई अर्थ नहीं है, जब अदालत में मामले की सुनवाई चल रही है. दूसरी बात है कि ऐसे स्वयंघोषित मध्यस्थता करने वालों का कोई मूल्य नहीं है. चाहे वह कितने भी बड़े व्यक्ति खुद को मानते हों. इसकी जरूरत नहीं है.

राम मंदिर पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रुख पर टिप्पणी करते हुए वृंदा करात ने कहा, जहां तक आदित्यनाथ का सवाल है उनका ना राम से लेना-देना है ना अयोध्या से कोई लेना-देना है. यह सिर्फ और सिर्फ उनकी तय नीति है समाज को विभाजित करने और निर्दोष लोगों की लाशों पर खड़े होकर अपनी राजनीति करने की. आदित्यनाथ एक धर्मनिरपेक्ष देश के मुख्यमंत्री होकर उनकी और इतनी हिम्मत जो कह दें कि सेकुलरिज्म, धर्मनिरपेक्षता ही एक गाली है और एक गलत शब्द है? और ऐसे लोगों को RSS और BJP ने मुख्यमंत्री बनाया है? यह बिल्कुल शर्म की बात है हिंदुस्तान के लिए.

योगी सरकार पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने आगे कहा, लोकल चुनाव के संदर्भ में इस प्रकार की घिनौनी सांप्रदायिक नीति को लेकर चलना, इससे उत्तर प्रदेश की जनता का कोई फायदा नहीं है. उत्तर प्रदेश में ना कानून व्यवस्था है ना किसानों का कुछ फायदा हुआ. वहां मजदूर परेशान है और व्यापार ठप पड़ा है. उस बीच में खड़े होकर राम का नाम लेकर इन तमाम चीजों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं.

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