गुजरात दंगे के स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राणा अय्यूब की किताब ‘गुजरात फाइल्‍स’ से मीडिया क्यों डर गई ?

गुजरात दंगे के स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राणा अय्यूब की किताब ‘गुजरात फाइल्‍स’ से मीडिया क्यों डर गई ?

गुजरात दंगे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब गुजरात दंगे की सच्चाई राणा अयूब अपनी किताब ‘गुजरात फाइल्स’ के जरिये जनता के सामने लाई हैं। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात जो सामने आई है वो ये की मीडिया ने इस किताब से दुरी बना ली।

देश के एक बड़े चैनल में काम करने वाले पत्रकार ने नाम न छपने की शर्त बताया ‘चुकी ये किताब अमित शाह और मोदी के काले चिट्ठों का पर्दाफाश करती है’

बता दें की पत्रकार राणा अय्यूब की गुजरात दंगों पर स्टिंग ऑपरेशन को लेकर किताब ‘गुजरात फाइल्‍स- अनाटॉमी ऑफ ए कवर अप’ में दावा किया है कि कई अधिकारियों ने 2002 दंगों के समय राजनीतिक दबाव की बात मानी थी। शुक्रवार को नई दिल्‍ली में यह किताब जारी हुई। अय्यूब ने कहा कि उन्‍होंने गांधीनगर स्थित बंगले पर मोदी का भी बयान रिकॉर्ड किया था। यह बयान घड़ी में कैमरा लगाकर रिकॉर्ड किया गया था।


गुजरात दंगे का सच जनता के सामने लाने के लिए इस किताब को लेकर जब वह पब्लिकेशन हाउसेज के पास राणा अयूब गईं तो सभी ने इस किताब को छापने से माना कर दिया था। यहां तक कि तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने भी उनका साथ नहीं दिया। इस हालात में उन्होंने खुद पैसे जुटाए और इस किताब को प्रकाशित कराया।

राणा अयूब कहती हैं कि दरअसल सभी पार्टियां मुसलमानों का रहनुमा बनती हैं और उन्हें लेकर राजनीति करती हैं लेकिन कोई मदद को आगे नहीं आता। कांग्रेस भाजपा के काले कारनामों को छुपाकर दरअसल उसे ब्लैक मेल करना चाहती थी।

राणा अय्यूब ने कहा कि सभी स्टिंग ऑपरेशन में अमित शाह साझा कड़ी थे। वे उस समय गुजरात के गृह मंत्री थे और अब भाजपा अध्‍यक्ष हैं। शाह को सोहराबुद्दीन मामले में जेल भी जाना पड़ा था। 2014 में सीबीआई कोर्ट ने उन्‍हें बरी कर दिया था। राणा अय्यूब का आरोप है कि तहलका ने उन्‍हें इस असाइनमेंट के लिए भेजा था। लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव का जिक्र करते हुए स्‍टोरी छापने से इनकार कर दिया। उनका दावा है कि उन्‍होंने अशोक नारायण, जीएल सिंघल, पीसी पांडे, जीसी राईघर, राजन प्रियदर्शी और वाईए शेख का भी स्टिंग ऑपरेशन किया था। उन्‍होंने खुद की पहचान अमेरिका की रहने वाली फिल्‍ममेकर के रूप में कराई और मैथिली त्‍यागी नाम बताया।

अय्यूब ने दावा किया कि उन्‍होंने तत्‍कालीन मुख्‍य सचिव(गृह) अशोक नारायण से पूछा था, ” आप को जब सीएम ने दंगों को नियंत्रित करने करने में सुस्‍ती दिखाने को कहा तो आप नाराज थे।” इस पर नारायण ने कथित तौर पर कहा, ”वह ऐसा कभी नहीं करेंगे। वह कुछ भी पेपर नहीं लिखते। उनके अपने आदमी हैं और उनके जरिए ही वे वीएचपी और फिर नीचे के पुलिस अधिकारियों तक जाते हैं।” अय्यूब ने उस समय सीआईडी(इंटेलीजेंस) के चीफ रहे जीसी राईघर से पूछा था: ”मुठभेड़ में क्‍या हुआ था। आप वहां थे।” उन्‍होंने बताया कि राईघर का जवाब था: ”मैं केवल एक में था। एक अपराधी (सोहराबुद्दीन) फर्जी मुठभेड़ में मारा गया । गलती यह हुई कि उन्‍होंने उसकी बीवी को भी मार दिया।”

किताब में हरेन पांड्या मर्डर केस पर भी एक चैप्‍टर है। इसमें जांच अधिकारी वाईए शेख के आरोपों को भी जगह दी गई है। बुक लॉन्‍च कार्यक्रम में पत्रकार हरतोश सिंह बल और राजदीप सरदेसार्द व वकील इंदिरा जयसिंह मौजूद थे। सरदेसाई ने कहा कि गुजरात दंगों के संबंध में वे एक बार एक वरिष्‍ठ जज से बात कर रहे थे तो उन्‍होंने कहा, ”ये जो मुसलमान है, वो बदलेगा नहीं। इसके साथ यही होना था।”

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