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अमित शाह को जेल पहुंचाया था, यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है : राणा अय्यूब

अमित शाह के साथ-साथ गुजरात के अनेक वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तथा राजनेताओं के स्टिंग ऑपरेशन पर आधारित बहुचर्चित पुस्तक ‘गुजरात फ़ाइल्स’ अब उर्दू में भी उपलब्ध है, जिसकी लेखिका राणा अय्यूब हैं। इस मौके पर राणा अय्यूब ने किताब और गुजरात दंगों पर किए गए स्टिंग के बारे में बात की ।

राणा अय्यूब ने कहा है कि उनकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी है कि उनकी इंवेस्टीगेटिव रिपोर्ट की वजह से अमित शाह जेल गए । 2006 से पत्रकारिता की शुरुआत करने वालीराणा अय्यूब कहती हैं कि मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी यही है

तहलका पत्रिका में ज्वाइन करने के बाद राणा अय्यूब ने 2010 गुजरात दंगों के लिए स्टिंग किया था । जब राणा गुजरात दंगों का स्टिंग कर रही थी उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ़ 26 साल थी । वो कहती हैं कि उन्होंने अपनी पहचान बदली, वो 8 महीने मैत्री त्यागी बनकर रहीं और उसकी ज़िंदगी जी ।

ब्यूरोक्रेट्स से होते हुए राणा ने अमित शाह का स्टिंग किया, लेकिन जिस दिन उन्होंने नरेंद्र मोदी का स्टिंग किया तहलका ने इंवेस्टीगेशन बंद करने को कहा । राणा अय्यूब कहती हैं कि मोदी आखिरी इंसान थे जिनका मैंने इस्टिंग किया था । उसी वक्त तहलका ने मुझे वापिस बुला । मोदी ने मुझे ओबामा की किताब दिखाई और कहा कि मैं एक दिन ओबामा के जैसे बनना चाहता हूं ।

राणा अय्यूब ने कहाकि इंवेस्टीगेशन की शुरुआत बहुत छोटे स्तर से की गई थी लेकिन जब मैं ब्यूरोक्रेट्स से होते हुए अमित शाह और फिर नरेंद्र मोदी तक पहुंच गई तो तहलका ने मुझे वापस बुला लिया । तहलका को डर था कि कहीं उसे एक बार फिर ना बंद करवा दिया जाए । लेकिन मुझे उस वक्त तक बहुत कुछ मिल चुका था । गुजरात के होम सेक्रेट्री, कमिश्नर ऑफ पुलिस, इंटेलीजेंस चीफ इन सब का स्टिंग मैं कर चुकी थी। मेरे शरीर में 6 कैमरे रहते थे ।मैं सिस्टम में घुसकर उनके जैसे बन गई थी । मैंने मुसलमानों की बुराई की, आरएसएस की तारीफ़ की ।

राणा बताती हैं कि अधिकारियों ने पहली बार माना कि उन्होंने जो किया वो अच्छा किया । वो एहसान जाफिरी की हत्या से खुश थे । पुलिस कमीशनर ने कहाकि मुसलमानों ने दो बार मारा हमने एक बार हमारी छाती चौड़ी हो गई ।

अधिकारियों ने स्टिंग में ये भी बताया कि मोदी के विरोधी हरेन पंड्या की हत्या में मोदी और आडवाणी का हाथ है । राणा अय्यूब कहती हैं कि मेरे स्टिंग आने के बाद मीडिया को एक बड़ा कैंपने चलाना चाहिए था लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया । एसआईटी ने मुझसे टेप भी नहीं मांगा । मेरी किताब के लॉंच में देश के सभी बड़े एडिटर शामिल थे लेकिन किसी ने कोई कुछ नहीं बोला । मेरी बुक को लॉन्च करने के बाद मोदी सरकार ने विरोध नहीं किया क्योकि उनको पता था कि मेरी किताब बैन करने के बाद उसे लोग और पढ़ेंगे ।

राणा दावा करती हैं कि उन्हें कोर्ट में कोई चैंलेज नहीं कर पाया ना ही ये कह पाया कि मेरा किया गया स्टिंग गलत है । वो कहती हैं कि मेरी उपलब्धि ये है कि किसी ने मेरी बात को नकारा नहीं है, सबसे टॉप लेबल के लोगों का स्टिंग किया है लेकिन कोई मुझे अदालत नहीं ले गया । इंडियन एक्सप्रेस ने जिन लोगों का स्टिंग किया उनसे बात की तो उन लोगों ने माना कि हम मैत्री नाम की लड़की से मिले थे ।

मेरे पास स्टिंग के सारे टेप्स हैं लेकिन मैं उन्हें इसलिए नहीं लॉन्च कर रही क्योंकि वो पब्लिसिटी के लिए नहीं हैं बल्कि इंसाफ़ के लिए हैं । मुझे इंतज़ार है कि कब मुझे एसआईटी बुलाएगी और मुझसे टेप मांगेगी । राणा अय्यूब ने कहाकि वो गुजरात दंगों की दोबारा जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगी ।

 

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