Sunday , September 23 2018

रांची के दानिश रियाज और मंजर इमाम की सजा पर फैसला आज

Judges gavel and law books stacked behind

स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के आतंकी ट्रेनिंग कैंप में शामिल होने के आरोप में रांची की बरियातू बस्ती निवासी दानिश रियाज उर्फ सफी और मंजर इमाम समेत 18 आरोपियों को एर्नाकुलम की अदालत ने दोषी पाया है। दानिश आंध्रप्रदेश की साइबर सिटी में एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, जबकि मंजर रांची विवि में उर्दू का टॉपर रहा है। दानिश साबरमती जेल जबकि मंजर तिहाड़ जेल में बंद है। मंगलवार को सजा सुनाई जाएगी।

इनके अलावा अदालत ने केरल के सदाउली, पीके शिब्ली,मो अंसार, अब्दुल सत्तार, कर्नाटक के हफीज हुसैन, शकील अहमद, मिर्जा अहमद बेग, मो शमी, नदीम, डॉ एके असदुल्ला, एमपी के सफदर नागौरी, कमरूद्दीन, आमिल, यूपी के अबू बशर, महाराष्ट्र के अबू फैजल , गुजरात के अफरीदी को धारा 120 बी, यूएपीए एक्ट व एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत दोषी पाया।

2008 में केरल के स्पेशल ब्रांच के डीएसपी केआर कृष्णा ने कोट्टायम जिले के मुंडाकायम में एफआईआर करायी थी। इसमें जिक्र था कि वागामोन, थंगलपाड़ा में सिमी आतंकियों ने दिसंबर 2007 में भारत में जेहाद के नाम पर आतंकी ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया था। 2010 में एनआईए ने जांच संभाली।

जांच में सामने आया कि शिविर में भारत के खिलाफ जेहाद छेड़ने, सांप्रदायिक सदभाव बिगाड़ने आदि की ट्रेनिंग दी गई। जांच के क्रम में एनआईए ने 28 मई 2011 को दानिश को बड़ोदरा से दबोचा। वहीं मंजर को 3 मार्च 2013 को कांके से गिरफ्तार किया।

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