Sunday , November 19 2017
Home / Editorial / लगता नहीं कि योगी सरकार अपना दूसरा वादा पूरा कर पाएगी: रवीश कुमार

लगता नहीं कि योगी सरकार अपना दूसरा वादा पूरा कर पाएगी: रवीश कुमार

भारतीय जनता पार्टी के घोषणापत्र का स्क्रीन शॉट है। इसमें साफ साफ लिखा है कि सभी लघु एवं सीमांत किसानों का फसली ऋण माफ किया जाएगा। इसकी अगली लाइन देखिये। सभी लघु एवं सीमांत किसानों को ब्याज मुक्त फसली ऋण दिया जाएगा। पहले वादे को पहली बैठक में पूरा करने की बात थी सरकार ने फैसला सुना दिया है। गृह सचिव की कमेटी इस पर विचार करेगी कि कहां से पैसा आएगा और किस तरह से भुगतान होगा। लेकिन दूसरा वादा भी दिलचस्प है। ब्याज मुक्त फसली ऋण देने का। लगता नहीं कि कर्ज़ माफ़ी के बाद ब्याज़ मुक्त ऋण देने का वादा सरकार पूरा कर पाएगी। इसके अलावा बीजेपी ने घोषणापत्र में यह भी कहा है कि गन्ना किसानों को फसल बेचने के 14 दिनों के भीतर पूरा भुगतान सुनिश्चित करने की व्यवस्था सरकार द्वारा लागू की जाएगी। पहले भी ऐसा नियम है मगर लागू नहीं होता। यह हो गया तो गन्ना किसानों को बहुत बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी। सरकार बनने के 120 दिनों के भीतर बैंकों और चीनी मिलों के समन्वय से गन्ना किसानों की बकाया राशि का पूर्ण भुगतान कराया जाएगा। उम्मीद है सरकार ये भी कर पाएगी और ऐसा कर सकी तो पश्चिम के गन्ना किसान कभी उसका साथ नहीं छोड़ेंगे। यही नहीं भूमिहीन किसानों को गाय व अन्य पशु देने का वादा है।

बीजेपी के घोषणा पत्र में यह भी लिखा है कि सभी खेतों में कम दरों पर पर्याप्त बिजली पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी और सभी किसानों को सरकार की ओर से एक नया एनर्जी एफिशियेंट पम्प दिया जाएगा। सोचिये, दो करोड़ बीस लाख किसानों के घर में नया नया पंप पहुंचेगा तो वो योगी सरकार का गुणगान करेंगे या नहीं। चुनाव के समय ये सारी बातें किसानों तक पहुंची ही होंगी। मीडिया को तो इन घोषणापत्रों से मतलब भी नहीं होता। वैसे बीजेपी के लोककल्याण पत्र में एक ऐसी बात है जो हो गया तो भारत के तालाबों के लिए खुशखबरी हो सकती है। वैसे किसी प्राधिकरण के बनने से विकास तो नहीं होता मगर तालाब राज्य व्यवस्था के केंद्र में तो आ ही जायेंगे। बीजेपी ने तालाब विकास प्राधिकरण बनाने का वादा किया है। बीजेपी ने लिखा है कि सभी अवैध कत्लखानों को पूरी कठोरता से बंद किया जाएगा और सभी यांत्रिक कत्लखानों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। सरकार अपने वादे का दूसरा हिस्सा पूरा नहीं कर रही है। सभी यांत्रिक कत्लखाने बंद नहीं हो रहे हैं। घोषणापत्र की पंक्ति से लगता है कि वैध अवैध हर तरह के यांत्रिक कत्लखाने बंद होंगे। पहली कैबिनेट बैठक के बाद यही कहा है कि जो लोग लाइसेंस के नवीनीकरण कराना चाहते हैं सरकार नियमों के मुताबिक नवीनीकरण करेगी। अधिकारियों के अतिउत्साह के कारण जिन बूचड़खानों के खिलाफ़ कार्रवाई की गई है, उन्हें चालू किया जाएगा।

6 अप्रैल 2017 के बिजनेस स्टैंडर्ड में सिद्धार्थ कलहंस और अभिजीत लेले ने लिखा है कि दिसंबर 2016 तक यूनियन बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ इंडिया और बैंक आफ बड़ौदा ने यूपी के किसानों को 70,046 करोड़ का लोन दिया है। इसमें से 49,811 फसली ऋण है। रिपोर्ट में यह बात नहीं है कि करीब पचास हज़ार करोड के फसली ऋण में लघु एवं सीमांत किसानों का कितना हिस्सा है। वैसे तो बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार यूपी के व्यावसायिक बैंकों ने 116,757 करोड़ का ऋण किसानों को दिया है, जिसमें से फसली ऋण 87,759 करोड़ है। सरकार ने चुनावी वादा पूरा करते हुए कुल 36,359 करोड़ का ऋण ही माफ किया है। आठ सदस्यों की एक कमेटी बनी है जो इस फैसले को लागू कराने के तरीके पर विचार करेगी। बैंकों को कैसे भुगतान किया जाएगा इसके लिए 15 मई तक उपाय खोजना होगा ताकि किसान इस साल का फसली ऋण ले सकें।

सरकार ने फसली ऋण माफ किया 30, 729 करोड़ का। यूपी के किसानों पर कुल फसली ऋण है 87,759 करोड़ रुपये। सारा माफ़ होता तो अच्छा होता मगर 30, 729 करोड़ की फसली ऋण का माफ होना कम बड़ी बात नहीं है। साथ ही अस्सी लाख टन गेहूं ख़रीद कर सरकार किसानों का घर ही भरेगी। आलू किसानों के लिए न्यूतनम समर्थन मूल्य तय करने का वादा किया था जिसके लिए कमेटी बना दी गई है। यह हुआ तो एक तरह से क्रांतिकारी होगी क्योंकि आलू किसान हर दूसरे मौसम में बर्बादी झेलते हैं। आलू का दाम गिरता है और वे बर्बाद हो जाते हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने लिखा है कि यूपी का वित्तीय घाटा 55,020 करोड़ का है। इस स्थिति में सरकार 36, 359 करोड़ का लोन माफ़ करने के लिए पैसे कहां से लाएगी। एक रास्ता है सरकार बांड निकालेगी। राज्य सरकारें ऐसा करती हैं। दूसरा तरीका ये है कि सरकार बजट में इसे न दिखाये ताकि वित्तीय घाटा न्यूनतम स्तर पर रखने की संवैधानिक ज़िम्मेदारियों का भी पालन हो सके। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार तेलंगाना की तरह 36000 करोड़ की राशि को पांच साल में वितरित कर सकती है। अगले पांच साल में लोन माफ होता रहेगा तो बजट पर अचानक इतना बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा। अगर सरकार कर्ज़ चुकाने के लिए बांड लाएगी तो उसे अपने वित्तीय स्वास्थ्य को भी बेहतर करना होगा वरना बांड में निवेश करने वाले नहीं आएंगे। तो राज्य सरकार के लिए इतना आसान नहीं है। इंतज़ार कीजिए कि कमेटी की रिपोर्ट क्या कहती है। ऐसी हालत में लगता नहीं है कि सरकार ब्याज मुक्त फसली ऋण का वादा पूरा कर पाएगी। लोग यह न सोचें कि इससे किसान नाराज़ हो जाएंगे। ऋण माफी की राशि से नहीं, नियत और फैसले से वे किसान भी खुश रहेंगे जिनका माफ नहीं हुआ है या जो इसके दायरे में नहीं आते हैं। इस फैसले से किसानों को फील गुड होगा।

 

 

TOPPOPULARRECENT