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बैंकों के बैंक रिज़र्व बैंक को नहीं पता कि नोटबंदी से कितना कालाधन ख़त्म हुआ, झूठ पकड़ा गया: रवीश कुमार

नोटबंदी के दौरान सवाल उठता रहा कि किसका फैसला था। कभी कहा जाता कि प्रधानमंत्री का फैसला था तो कभी बताया गया कि भारतीय रिज़र्व बैंक के सुझाव पर सरकार ने अमल किया। यह भी कहा गया कि महीनों की गुप्त तैयारी के बाद नोटबंदी का फैसला किया गया।

3 सितंबर 2016 को भारतीय रिज़र्व बैंक का पदभार छोड़ने वाले रघुराम राजन ने ग्यारह महीने बाद कहा है कि उन्होंने अपना कार्यकाल में कभी भी नोटबंदी पर मुहर नहीं लगाई। न ही सरकार ने आर बी आई से कहा था कि नोटबंदी पर विचार करें, तैयारी करें। जब 3 सितंबर 2016 तक विचार नहीं हुआ, तैयारी नहीं हुई तो एक महीने के बीच क्या हुआ कोई नहीं जानता है।

10 जनवरी 2017 के इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स आफ इंडिया में पी टी आई के हवाले से ख़बर छपी है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने कहा कि 7 नवंबर को सरकार ने हमसे राय मांगी। आठ की सुबह बोर्ड ने बैठक कर हामी भर दी। शाम को नोटबंदी का एलान हो गया। इसका मतलब आठ नवंबर की सुबह तक कोई तैयारी नहीं थी। हमें यह नहीं मालूम कि क्या आठ की सुबह आर बी आई ने नोटबंदी करने की तैयारी और समय सीमा पर भी कोई राय दी थी।

आर बी आई ने संसदयी समिति को अपने 7 पन्नों के जवाब में भी यही कहा था कि उनसे सरकार ने कहा था कि आतंकवादी फंडिंग, जाली नोट और काला धन रोकने के लिए नोटबंदी करनी है। उस समय कुछ मंत्री कहा करते थे कि रिज़र्व बैंक ने अपनी तरफ से ये राय सरकार को दी है। ज़ाहिर है अलग अलग ज़ुबान में झूठ और सच बोला जा रहा था।

कितना जाली नोट था, इस पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने कह दिया है कि अभी तक 40 करोड़ मूल्य के जाली नोट पकड़े गए हैं और नए नोटों के नकली नोट की बरामदगी में 20 प्रतिशत की तेज़ी आई है। काला धन के बारे में भारतीय रिज़र्व बैंक ने संसदीय समिति से कहा है कि नोटबंदी से कितना काला धन समाप्त हुआ है, इसके बारे में कोई सूचना नहीं है।

तो भारत के रिज़र्व बैंक को नहीं पता है कि कितना काला धन मिटा। 15 अगस्त को लाल किले से कहा गया कि काला धन के रूप में पौन दो लाख या दो लाख करोड़ की राशि की शिनाख़्त हुई है। जिस रिज़र्व बैंक से काला धन समाप्त करने के लिए नोटबंदी पर राय मांगी गई थी, उसी को पता नहीं हैं।

रिज़र्व बैंक, बैंकों का बैंक है। इसे ही नहीं पता है कि नोटबंदी से कितना कालाधन समाप्त हुआ है। पकड़ा गया है। इससे ध्यान भटकाने के लिए ज़रूरी है कि किसी ट्रक का पीछा किया जाए कि उसमें तस्करी के लिए गाय ले जाई जा रही है। ये और बात है कि ट्रक से गधा निकल गया। 4 सितंबर के हिंदुस्तान टाइम्स में यह ख़बर छपी है। गौ रक्षकों ने इस आशंका में कुछ की पिटाई भी कर दी। हताश नहीं होना है, हिन्दू मुस्लिम टापिक की कमी नहीं है इस देश में। मिल जाएगा और बहस चालू।

 

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