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गुजरात दंगों के दौरान हत्या करने वाले हिन्दुओं को राना अय्यूब की यह किताब ज़रूर पढ़नी चाहिए: रवीश कुमार

2002 के गुजरात दंगों के राजनीतिक पक्ष को ही उभारा गया जो बाद में 84 बनाम 2002 के कुतर्कों से समतल हो गया। क़ानूनी पक्ष गौण रहा। गुजरात दंगों में अंदाज़न सौ से भी अधिक हिन्दू और मुस्लिम दंगाइयों को सज़ा हुई है। मुमकिन है संख्या इससे भी अधिक हो। यह बात माननी पड़ेगी कि गुजरात दंगा अकेला दंगा है जिसमें बड़ी संख्या में दंगाइयों को सज़ा हुई मगर दंगों और एनकाउंटर में कथित रूप से भूमिका निभाने वाले बड़े और मंझोले पुलिस अधिकारी और नेता बच निकले या बचा लिए गए।

भीड़ में शामिल जिन आम लोगों को सज़ा हुई उनकी कहानी भी गौण रही कि कैसे वे नेताओं के बहकावे में आकर हत्यारा बने और मुक़दमा लड़ने में बर्बाद हुए। हिन्दू सज़ायाफ़्ता भी और मुस्लिम सज़ायाफ़्ता भी। हमें नहीं मालूम वकील करने और तारीखों में पिस कर उनका परिवार कैसे बर्बाद हुआ। कभी किसी नेता को उनकी मदद के बारे में तो नहीं सुना। वो विराट सांप्रदायिक हिन्दू और सांप्रदायिक मुस्लिम विचारधारा के लिए अब किसी काम के नहीं रहे। झुंड में नए लोगों की भर्ती हो चुकी है। नई पीढ़ी के सांप्रदायिक युवाओं और युवतियों के लिए काम की किताब है। उल्लू बनने से बचेंगे।

राना अय्यूब की किताब गुजरात फाइल्स को 2002 में मूर्ख बनकर हत्या कर बैठे लोगों को भी पढ़ानी चाहिए। जेलों में भिजवा देनी चाहिए। आरोपी भी ज़रूर पढ़ें । अब यह किताब हिन्दी में है। उर्दू, मराठी,पंजाबी,अंग्रेजी, कन्नड में तो है ही। वैसे यह किताब दंगों पर नहीं फ़र्ज़ी एनकाउंटर पर है।

इसे अंतिम सत्य की जगह तथ्यों और संदर्भों के करीब समझ कर पढ़िए। दंगोँ के लिए आप मनोज मिट्टा की किताब Modi and Godhra: the fiction of fact finding पढ़ सकते हैं।

इस किताब को छापने से कई प्रकाशक डर गए। कई मीडिया हाउस ने समीक्षा नहीं छापी। आई टी सेल वाले भी चुप रहते हैं। राना को भद्दी गालियाँ देते हैं मगर किताब को लेकर चुप रहते हैं। हंगामा करेंगे या बैन करेंगे तो ज़्यादा लोग न पढ़ लें ।

राना अय्यूब का कहना है कि किसी ने मानहानि का मुक़दमा भी नहीं किया। वैसे ये सब न करने के लिए सरकार की तारीफ करनी चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है एनडीए सरकार इस किताब को कोर्स में शामिल करेगी। हिन्दी पत्रकारिता के छात्र इसे अवश्य पढ़ें और प्रोजेक्ट बना कर वाइस चांसलर को गुप्त नाम से भेज दें ।

 

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