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रवीश कुमार: इन दिनों मेसेज आया कि आपके ‘भक्त’ भी तो गाली देते हैं, मैं सही में शर्मिंदा हूँ…

इन दिनों कमेंट में एक नया ट्रोल मेसेज शुरू हुआ है कि आपके ‘भक्त’ भी तो गाली देते हैं। ये दो बातें अब आलोचना की आड़ में हर गाली देने वालों के मेसेज में होती है । इसीलिए इसे ट्रोल मेसेज कहा। मज़ेदार बात ये है कि उसी कमेंट में लिखने के बाद ट्रोल भी गाली देता हैं।

मैंने कई कमेंट पढ़े। ऐसी प्रवृत्ति नहीं दिखी। मेरी नज़र से बेहद कम मेसेज ऐसे गुज़रे जिसमें गालियाँ हो। मगर एक में भी है तो यह ठीक बात नहीं है। मुझे शर्मिंदा होना पड़ा है। आप गालियों का इस्तमाल न करें। गुस्सा सबको आता है। बोलचाल की ज़ुबान में गालियाँ आम होती हैं पर वहाँ भी इसे ठीक कीजिए। कोशिश करेंगे तो बोलने लिखने में ये बीमारी समाप्त हो सकती है या कम हो सकती है।

दूसरा मेरा फैन न बनें। भक्त न बनें। मैं पहले भी कस्बा पर इस बारे में लिख चुका हूँ। फिर भी लोग कहते हैं कि हम आपके फैन हैं। यह हमारे समय का कहने का तरीका भी हो गया है। आप किसी को पसंद करते हैं तो कह देते हैं कि फैन हैं। गाँव देहात में भी लोग बोलने लगे हैं। यह कोई बड़ी बात नहीं है।

मगर इससे आगे न जाएँ। फिर आप भक्त बन जाते हैं। यह एक बीमारी है। ट्रोल ख़ुद भक्त हो चुके हैं मगर अब वे आपको बीमार साबित करना चाहते हैं। यह भी एक रणनीति है। ट्रोल आई टी सेल से संचालित एक राजनीतिक गतिविधि है जिसका मकसद है जनता में बोलने को लेकर दहशत पैदा करना। अब वे मेरे पोस्ट से सहमति रखने वाले हर किसी को भक्त ठहराना चाहते हैं । जबकि आप हैं नहीं और होंगे भी नहीं। मेरी कोई ट्रोल सेना नहीं है। मेरा कोई आई टी सेल नहीं है ।

आप मेरे साथ हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आप भक्त हैं। मैं ऐसा बिल्कुल नहीं मानता। उन्हें पता है कि सोशल मीडिया की राजनीतिक शब्दावली में भक्त अब सम्मानित शब्द नहीं रहा इसलिए ये कीचड़ आप पर भी फेंक रहे हैं। कई नाम से टाइप किए गए मेसेज में जब यह बात बार बार आई तो लगा कि ट्रोल सेना के चीफ़ ने कोई नई रणनीति बनाई है। मेरी बात से सहमत हर किसी को भक्त बोलो और लिखों कि वे गाली देते हैं। अब वे ऐसा भी कर सकते हैं कि फेक आई डी से लिखें कि मैं आपका फैन हूँ, फिर गाली दें ताकि आपको बदनाम किया जा सके।

आप सतर्क जनता हैं। सत्ता को सजगता से देखने के क्रम में मेरी लड़ाई में साथ देते हैं। आप भक्त नहीं हैं पर वे आपको भक्त बताएँगे। घबराना नहीं है। आई टी सेल भारत के युवाओं को बर्बाद करने का अड्डा है। इनकी करतूत का नमूना आप देखते ही रहते हैं।

फिर भी अगर किसी ने कमेंट गाली दी है तो उन्हें नहीं देनी चाहिए। ऐसा कोई करेगा तो ब्लाक किया जाएगा। सारे कमेंट तो नहीं पढ़ पाता मगर गाली दिखी तो दोनों तरफ के लोगों का कमेंट ब्लाक होगा और डिलिट भी। कभी निकल जाए तो ख़ुद से भी अपना कमेंट डिलिट कर दीजिए। प्रायश्चित से बेहतर कोई रास्ता नहीं ।

कई बार पोस्ट कुछ और होता है और कमेंट में लंबा लंबा टाइप किया हुआ किसी और बात का मेसेज होता है। ये ट्रोल कंटेंट होता है। ऐसे मेसेज को ब्लाक और डिलिट किया जाना ज़रूरी है।क्रिकेट के मैच में फ़ुटबॉल नहीं चलेगा।

मेरे एकाध मित्र फेसबुक स्टेटस में लिखते समय गंदी गालियाँ देते हैं। वो मेरी भक्ति में नहीं बल्कि अन्य संदर्भों में लिखते समय देते रहे हैं। पिछले दो तीन दिनों में कई दोस्तों ने याद दिलाया है। उनकी बात सही निकली। मैं सही में शर्मिंदा हूँ । अब अगर मैंने दोबारा उनके पोस्ट में गालियाँ देखी तो ब्लाक कर दूंगा । एक ग़लती बार बार नहीं करनी चाहिए। मुझे सही में बहुत दुख हुआ है। आप कभी गाली न दें और कभी ट्रोल न बनें ।

 

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