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भारत संस्कृति और इतिहास जैसे मुद्दों पर तो भाषण दे सकता है, लेकिन आर्थिक वृद्धि पर नहीं: रघुराम राजन

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने जीडीपा ग्रोथ को लेकर एक बार फिर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निसाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार को दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था को लेकर अपना सीना तब तक नहीं ठोकना चाहिये जब तक कि लगातार दस साल तक मजबूती से जीडीपी वृद्धि हासिल नहीं कर ली जाती है।

मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में राजन ने कहा कि भारत संस्कृति और इतिहास जैसे मुद्दों पर तो दुनिया में बढ़चढ़कर अपनी बात कह सकता है, लेकिन आर्थिक वृद्धि के मामले पर उसे ऐसा तभी ऐसा करना चाहिए जब वह दस साल तक 8 से 10 प्रतिशत की उच्च आर्थिक वृद्धि दर हासिल कर लेता है।

राजन ने कहा, ‘ भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में घटकर 5.7 प्रतिशत पर आ गई है। यह इससे पिछली तिमाही में 6.1 प्रतिशत रही थी। दोनों तिमाहियों में चीन की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा कि वृद्धि दर को आठ या नौ प्रतिशत पर पहुंचाने की जरूरत है। यह निजी निवेश बढ़ने या निर्यात की स्थिति सुधरने पर ही होगा।

यह पहली बार नहीं है जब राजन ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर ऐसा बयान दिया हो। पिछले साल अप्रैल में उन्होंने कहा था कि तेजी से बढ़ता भारत ‘अंधों में काना राजा’ है। उन्होंने कहा था, ‘मैं कोई भविष्यवाणी नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि खुद को लेकर अति उत्साह दिखाते समय हमें सतर्कता बरतनी चाहिए। ग़ौरतलब है कि उसके बाद से प्रत्येक तिमाही में हमारी वृद्धि दर गिरी है।

राजन के इस बयान पर उस समय विवाद खड़ा हो गया था। बीजेपी के राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यन स्वामी ने उन्हें बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा था कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह से भारतीय नहीं हैं।

बता दें कि दो दशक में राजन रिजर्व बैंक के एकमात्र गवर्नर रहे हैं जिन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं मिला है।

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