धर्म और उम्र का बंधन तोड़कर ज़ाकिर से मिली ज्योति!

धर्म और उम्र का बंधन तोड़कर ज़ाकिर से मिली ज्योति!

गाज़ियाबाद: दो अलग अलग धर्म, लेकिन सोच एक जैसी और उम्र भी, मगर धर्म के बाद दसूरी बड़ी रुकावट उम्र ही थी। दोनों उम्र के उस पड़ाव में पहुँच चुके हैं, जिसमें शादी करना समाज को नहीं भाता।

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उसके बाद भी दोनों ने शादी की, जिसमें वन स्टाप सेंटर यानी आशा ज्योति केंद्र का सहयोग और समर्थन रहा। जोड़े का नाम है ज्योति (बदला हुआ नाम) और ज़ाकिर (बदला हुआ नाम) एक साथी लगभग दो दशक पहले दामन छोड़ गया तो दुसरे की बेगम का तीन साल पहले इन्तेक़ाल हो गया था।
कोलकाता की निवासी 46 साला ज्योति की दो बेटियां और दो दशक पहले उनके पति के खानदान को छोड़ कर चले गये थे। दोनों बेटियों को उनके मामा के हवाले छोड़कर ज्योति दिल्ली आकार मेड कॉम करने लगीं। चार साल पहले बड़ी बेटी की दिल्ली में ही शादी कर दी, वहीं सिकंदराबाद के निवासी ज़ाकिर के तीन बेटे हैं, जिनमें से दो की शादी हो चुकी है।

तीन साल से पहले बीमारी की वजह से ज़ाकिर की पत्नी का निधन हो गया। दिल्ली में गारमेंट्स सप्लाई करने वाले ज़ाकिर की मुलाक़ात दो महीने पहले ज्योति से हुई। पहली, दूसरी और फिर तीसरी मुलाक़ात के बाद दोनों के जहन में चाह जाग उठी, मगर इस कहानी में टूईस्ट है।

दो सप्ताह पहले ज्योति ज़ाकिर के साथ उसके बीमार सेल को देखने डासना आईं। यहाँ उन्होंने बेटी से बात भी की, लेकिन उसी बीच फोन सुइच ऑफ़ हो गया। बेटी को मां की फ़िक्र हुई तो पहले 100 नंबर और फिर 181 (हेल्पलाइन नंबर) पर काल करके अगवा की सुचना दी। डासना आखिरी लोकेशन होने की वजह से 181 काल गाज़ियाबाद ट्रांसफर हो गई। वन स्टाप सेंटर ने पुलिस के जरिए ज़ाकिर से राबता किया और ज्योति से भी बात हुई।

अगवा की बात से दोनों ने इंकार किया, केस वर्कर प्रियान्जली मिश्रा ने बताया कि दोनों खुद ही केंद्र पहुंचे। यहाँ पूरा मामला बताया और दोनों ने शादी की ख्वाहिश ज़ाहिर की। दोनों के खानदान से प्रियांजली ने बात की और थोड़ी सी काउंसलिंग के बाद दोनों की औलाद शादी को तैयार हो गईं और 23 फरवरी को दोनों के खानदान वालों की मौजूदगी में केंद्र के वर्करों ने उनकी शादी रजिस्टर कराई।

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