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भारत में डॉक्टर के पास मरीजों के लिए सिर्फ दो मिनट का वक़्त- रिसर्च

Bodh-Gaya, 11 November, 2013

एक नए अध्ययन में डॉक्टर को लेकर बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है| ब्रिटेन की चिकित्सा पर आधारित पत्रिका बीएमजे ओपन ने दावा किया है कि दुनिया में 15 देश जिसमें विश्व की आधी आबादी के लोग निवास करते हैं| वहां पर उनकी प्राथमिक चिकित्सा का स्तर या परामर्श एक मरीज़ के लिए सिर्फ 5 मिनट या उससे भी कम है| जिसमें से अगर भारत की बात की जाये तो यहाँ इसका औसत प्रति व्यक्ति 2 मिनट का है| इसका मतलब भारत में डॉक्टर अपने मरीजों को सिर्फ 2 मिनट ही देखता है| भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश और पाकिस्तान में इससे भी बुरा हाल है वहां पर प्रति व्यक्ति औसत क्रमशः 48 सेकंड और 1.3 मिनट है| जिससे आप अंदाज़ा लगा सकता हैं कि वैश्विक स्तर पर हमारा चिकित्सा का स्तर कितना गिरा है|

अगर हम इस मामले में इसके उच्च स्तर पर बात करें तो इस अध्ययन के हिसाब से स्वीडन सबसे सही साबित हुआ है चिकित्सा के परामर्श पर जिसका औसत प्रति व्यक्ति 22.5 मिनट है| यहाँ के डॉक्टर अपने एक मरीज़ पर इतना टाइम खर्च करता है जो की चिकित्सा के लिहाज से बहुत बेहतर है| इसके बाद अमेरिका और नार्वे का नंबर आता है जहाँ पर लगभग 20 मिनट का समय लेते हैं डॉक्टर मरीजों को देखने के लिए| इस शोध में ब्रिटेन के तमाम अस्पतालों के शोधकर्ता शामिल हुए थे| उनका कहना है कि मरीजों के लिए इतना कम वक़्त देने उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है| यह आने वाले समय के लिए ठीक नहीं है इसका स्तर बढ़ता ही जायेगा|

इस शोध में लगभग 178 संस्थानों में समय की औसत दर को पता करने के लिए शोध किया गया| इस शोध में लगभग 67 देश के 2.85 करोड़ से ज़्यादा परामर्श को समेटा गया| इस शोध में चिकित्सा का स्तर मरीजों के साथ कैसा है| डॉक्टर उनके साथ कैसा व्यौहार करते हैं तथा वह मरीज़ को कितना वक़्त देते हैं इन सब बातों को ध्यान में रखकर किया गया| किये गए अध्ययन में दावा किया है कि मरीजों को कम समय दिए जाने से स्वास्थ्य सेवाओं में परेशानी का सबब बन सकता है उन्होंने कहा की सेवा संस्थानों में ज़रूरत से ज़्यादा भीड़ है और प्राथमिक स्तर पर डॉक्टर की कमी भी है| इससे स्वास्थ्य व्यवस्था लचर है| दिन-ब-दिन इसका स्तर बढ़ता ही जायेगा|

स्वास्थ्य से जुड़े मामलों के जानकर रवि दुग्गल ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए कहा कि भारत के अस्पतालों में भीड़ की वजह से मरीजों को परामर्श के लिए कम समय मिल पाता है| ओपीडी में भीड़ ज़्यादा होती है जिससे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर एक समय में दो से तीन मरीज़ों को देखते हैं|

 

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