Monday , September 24 2018

राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताने के बाद भारत में बेरोजगार हो रहे हैं रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी!

मोदी सरकार ने अभी हाल ही में देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए रोहिंग्या मुसलमानों को देश से निकालने का फैसला किया है. इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर जहां एक तरफ कुछ लोग सरकार का समर्थन कर रहे है. वहीं कुछ लोग इस फैसले को इंसानियत के खिलाफ बता रहे है.

सबसे बड़ी बात यह है कि इन बयानों के आने के बाद अब इनको कोई काम नहीं देना चाहता है. इनकी बेरोजगारी बढ़ रही है.

मानवाधिकार संगठन भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि इन शरणार्थियों को देश में ही रहने दिया जाए. वहीं सरकार का मानना है कि रोहिंग्या मुसलमान अवैध प्रवासी हैं. इसलिए कानून के मुताबिक उन्हें बाहर किया जाना चाहिए. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है.

सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या पनाह गुज़ीनों के लिए दायर एक याचिका में कहा गया कि इनका प्रस्तावित निष्कासन संविधान धारा 14 और धारा 21 के खिलाफ है. अब सवाल यह उठता है कि भारत सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को क्यों निकालना चाहती है?

म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों का कत्लेआम सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस चर्चा में भारत सरकार का वह फैसला भी है जिसमें म्यांमार से आए मुस्लिम रोहिंग्या शरणार्थियों को देश से निकालने का आदेश है.

ट्विटर पर आलमगीर रिज़वी नाम के एक व्यक्ति ने लिखा कि एक भारतीय होने के नाते रोहिंग्या मुसलमान के दर्द का अहसास है. मुझे लगता है भारत सरकार का यह फैसला गलत है. राजीव नाम के व्यक्ति ने लिखा कि रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या को हमें समझना चाहिए. क्योंकि हम सब इसी दुनिया में रह रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र रोहिंग्याओं को म्यांमार के धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक बताता है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक यह दुनिया के सबसे प्रताड़ित अल्पसंख्यकों में से एक हैं. म्यांमार सरकार का कहना है कि यह भारतीय महाद्वीप से हाल ही में आए शरणार्थी हैं. यही वजह है कि देश का संविधान उन्हें नागरिकता प्रदान करने के लिए उपयुक्त नहीं मानता.

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