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रोहिंग्या मुसलमानों को सरकार से उम्मीद, कहा- भारत जैसे मेहमाननवाज़ देश में हमें शरण ज़रूर मिले

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बीते सप्ताह तमाम राज्य सरकारों को यह फरमान जारी किया कि वह देश में रह रहे सभी अवैध शरणार्थियों को वापस भेजे। सरकार के इस फैसले के बाद से देश में रह रहे रोहिंगिया मुसलमानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। भारत में करीब 40 हज़ार रोहंगिया शरणार्थी मुसलमान रहते हैं।

दिल्ली के एक रिफ्यूजी कैंप में रहने वाली फातिमा कहती हैं कि वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में रह रही हैं, उनके दो बच्चे यहां पैदा हुए हैं, दिल्ली ही अब उनकी दुनिया है। वह किसी भी कीमत पर भारत छोड़कर म्यांमार वापस नहीं जाना चाहती।

फातिमा के लिए म्यांमार अब पराया देश हो चुका है। वह कहती हैं कि म्यांमार उनके लिए एक बुरे सपने की तरह है, जिसे वह कभी नहीं देखना चाहती। वह कहती हैं कि म्यांमार में अभी भी धार्मिक उत्पीड़न जारी है। वहां औरतों के साथ रेप होता है, लोगों की हत्या कर दी जाती है। 

जब फातिमा से केंद्र सरकार के फरमान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है। वह बस यह उम्मीद करती हैं कि भारत सरकार रोहंगिया मुसलमानों को वापस नहीं भेजेगी।

फातिमा कहती हैं कि उन्हें पता नहीं है कि भविष्य क्या होगा, लेकिन उसकी फरियाद है कि भारत जैसे आज़ाद और मेहमाननवाज़ देश में उन्हें शरण मिलनी चाहिए। फिलहाल भारत में रह रहे लगभग 40 हजार रोहंगिया मुसलमानों का भविष्य अधर में लटका है।

PIC Courtesy: Indian Express

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