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RSS का सबसे बड़ा ‘शक्ति प्रदर्शन’ 25 फरवरी को मेरठ में, क्या है संघ का इरादा?

मेरठ : माकूल माहौल और अवसर को लपकते हुए संघ एक बार फिर वेस्ट यूपी में अपनी ताकत का परदर्शन करेगा। जी हाँ, उत्तर प्रदेश के मेरठ की धरती अब आरएसएस के ‘वर्चस्व’ का गवाह बनेगा। 25 फरवरी को RSS यहां अपनी स्थापना के बाद का सबसे बड़ा ‘शक्ति प्रदर्शन’ करेगा। संघ के तीन लाख से अधिक स्वयंसेवकों के इस कार्यक्रम में जुटने की संभावना है। नौजवान, किसान, अधिवक्ता, व्यापारी, डॉक्टर, शिक्षक सहित समाज के सभी वर्ग इसमें शामिल होंगे। इस आयोजन को ‘राष्ट्रोदय समागम’ का नाम दिया गया है। मंच पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ स्वामी अवधेशानंद गिरि सहित कुछ और धर्म गुरु होंगे। करीब 650 एकड़ के प्रांगण में हो रहे इस आयोजन में 14 जिलों के 10580 गांवों की सहभागिता का लक्ष्य है। इससे पहले केरल के कोल्लम में 92 हजार स्वयंसेवक एक साथ जुटे थे। पिछले दिनों जातीय संघर्षों एवं ध्रुवीकरण के लिए चर्चित मेरठ एवं आस-पास के जिलों में इस बहाने संघ समरसता के सुर छेड़ेगा।

संघ का दावा है कि कार्यक्रम ‘सामान्य व्यक्ति की मनोभूमिका एवं व्यवहार राष्ट्रभक्ति से युक्त’ बनाने का प्रयास है। जाहिर है जब राष्ट्रवाद की लहर वोट में बदल रही हो, तो यह प्रयास 2019 की जमीन को भी नमी देंगे। नजर 2019 की संजीवनी तैयार करने पर भी होगी। 2014 में भी बीजेपी को ताकत पश्चिम से ही मिली थी और इस आयोजन का भी केंद्र पश्चिम यूपी ही है। इसमें मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, शामली और बागपत जैसे वह जिले शामिल हैं, जिन्होंने 2014 में ध्रुवीकरण को खुराक उपलब्ध कराई थी। इस बार मंच सामाजिक समरसता युक्त ‘राष्ट्रोदय’ का होगा, जिसमें सबक हिंदुत्व एवं राष्ट्रीयता के होंगे।’

मेरठ प्रांत संघ के लिहाज से मेरठ, मुरादाबाद और सहारनपुर के 14 जिले आते हैं, उसके हर गांव में उसका स्वयंसेवक तैयार हो चुका है। हर न्याय पंचायत तक शाखा फैल चुकी है। कार्यक्रम की तैयारी करीब एक वर्ष से चल रही है जिसमें 3.11 लाख से अधिक प्रतिभागियों के पंजीकरण हुए हैं।
मेरठ, मवाना एवं सरधना से सभी जाति एवं वर्ग के तीन लाख परिवारों से आगंतुकों के लिए भोजन के 6 लाख पैकेट एकत्र किए जाएंगे। दर्शक के तौर पर सभी मत, पंथ के लोगों, महिलाओं, संतों के आमंत्रण का भी दावा है। कार्यक्रम में स्वयंसेवक के रूप में बीजेपी के प्रदेश से लेकर पश्चिम क्षेत्र, उत्तराखंड एवं हरियाणा के कई अहम चेहरों की भी सहभागिता दिखेगी।

कुछ गढ़े गए और कुछ खुद के आवरण से तैयार किए गए मिथकों से अपने चारों ओर बने ‘रहस्य’ के परतों को संघ धीरे-धीरे खोलने में लगा है। जानकारों का कहना है कि सामाजिक समरता के नियमित हो रहे सार्वजनिक प्रदर्शनों की यह कवायद भी संघ की खुद पर लगे ठप्पे मिटाने की कोशिश है। आयोजन के लिए हर घर से रोटी जुटाने की पहल भी सहारनपुर से लेकर दूसरे जिलों तक दलितों एवं सर्वणों के बीच हुए जातीय संघर्ष पर मरहम लगाने की ही कड़ी मानी जा रही है।

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