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RSS का हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं, ये लोग धोखेबाज़ हैं : शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती

रांची: द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि आरएसएस हिंदू का नाम लेता है, लेकिन हिंदुत्व से इनका कोई लेना-देना नहीं है। ये हमलोगों को धोखा दे रहे हैं कि हम हिंदू धर्म की हिफाज़त करने आए हैं। यह और ज्यादा घातक है। आरएसएस के लोगों ने गणवेश बदल दिया। डॉ. हेडगेवार ने जो गणवेश तय किया था, उसे बदलने का इन्हें क्या हक है। शंकराचार्य जुमेरात को अनंतपुर में सहाफियों से बातचीत कर रहे थे।

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि आरएसएस अपनी शाखाओं में क्या बता रही है, जबकि उनके लीडर खुद कहते हैं कि अरुणाचल प्रदेश में तीन हजार स्वयंसेवक गोमांस खाते हैं। तो ये कौन सी कल्चर सिखा रहे हैं। हमारे बच्चों को बिगाड़ रहे हैं। कम्युनिस्ट भी किसी को तंजीम में शामिल करने से पहले कम्युनिज्म की जानकारी देता है। फिर आरएसएस अपने स्वयंसेवकों को राष्ट्रभक्ति की बात क्यों नहीं बताता है।

उन्होंने कहा कि मुल्क में भाजपा की सरकार है। इससे पहले कांग्रेस की थी। दोनों सरकारों में गाय का क़त्ल होता रहा है। फिर कांग्रेस और भाजपा में फर्क क्या है। भाजपा ने पहले कहा कि राम मंदिर बनाएंगे, दफा 370 हटाएंगे। अब कहती है कि हम उसकी जायजा करेंगे। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर को भी उन्होंने आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि श्रीश्री रविशंकर हिंदू कल्चर के साथ मजाक कर रहे हैं। यमुना किनारे वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल में जुटे विदेशियों ने क्या गोमांस खाना छोड़ दिया है। धूम्रपान और नशा करना छोड़ दिया है। ये ब्रह्मचारी हो जाएंगे क्या। फिर बनावटी धर्म का प्रचार क्यों।
असहिष्णुता पर उन्होंने कहा, कोई हिंदू सुअर का मांस खाए, इसकी पार्टी दे, फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे सार्वजनिक करे और मुस्लिम इसे बर्दाश्त कर ले तो हम मानेंगे कि यह सहिष्णुता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ भारत में ही खातून की पूजा होती है। आज शनिदेव के दर्शन के लिए एक खातून हवाई जहाज से महाराष्ट्र के शनि सिगनापुर पहुंचती है। यह कैसी भक्ति है। उसकी हवाई यात्रा का खर्च कौन वहन कर रहा है। वह खातून चुनाव हारी हुई है। अगर उसे महिलाओं के हक के लिए लड़ना है तो मुस्लिम महिलाओं के लिए लड़े। उनके चेहरे से बुरका हटाए।

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