Monday , July 23 2018

‘मोहन भागवत की नज़र बिहार और यूपी में हिन्दुत्व वोट को मजबूत करने पर है’

संघ प्रमुख मोहन भागवत अपने छह दिवसीय काशी प्रवास में मिशन : 2019 की जमीन तैयार कर गये। मिशन में सफलता का सूत्र भी बताया। उस मिशन में सम विचारी या आनुषांगिक संगठनों की सक्रिय भूमिका तो रहनी ही है, आरएसएस की कोशिश है कि अब तक समर्थक की भूमिका में दिखने वाला समाज का तबका और सामाजिक संगठन भी सक्रिय सहयोगी की भूमिका निभाये।

इसीलिए समन्वय बैठक के दिन कई सामाजिक संगठनों के भी प्रतिनिधियों से संघ प्रमुख ने सीधी बातचीत की। अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा व संघ परिवार के लिए गोरक्षा, सामाजिक समरसता, अयोध्या में रामजन्म भूमि पर मंदिर निर्माण और हिंदुत्व प्रमुख मुद्दा होगा।

ये मुद्दे बीजेपी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। आनुषांगिक संगठनों, संतों-समाजसेवियों एवं संस्कृति प्रेमियों के साथ अलग-अलग बैठक में संघ प्रमुख ने स्पष्ट संकेत दिया कि संघ अपनी विचारधारा, सिद्धांत और एजेंडे से पीछे नहीं हटने वाला।

संघ प्रमुख का इस बार छह दिनों तक काशी में प्रवास, पहली बार 25 हजार स्वयंसेवकों का जुटान, सामाजिक समरसता पर जोर, धर्मांतरण के मुखर विरोध पर जोर को मिशन: 2109 की भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। कुछ ऐसा ही वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव के पहले हुआ था।

तब निवेदिता शिक्षा सदन में संघ प्रमुख की तीन दिवसीय पाठशाला लगी थी। संघ प्रमुख को यह बात अच्छी तरह मालूम थी कि नरेन्द्र मोदी के बनारस से चुनाव लड़ने का फायदा न केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश बल्कि बिहार में भी होगा। संघ की यह रणनीति काम आयी। यूपी में 80 में से 73 सीटों पर भाजपा की जीत हुई।

इस बार भी संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों को अपने संकल्पों को साधने का लक्ष्य दिया है ताकि संघ के अधूरे कार्य को न केवल पूरा किया जा सके बल्कि स्थापना का सौवां वर्ष आते-आते 2025 तक हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना साकार हो सके। इसके लिए संघ घर-घर मतदाताओं की किलेबंदी करने में अभी से जुट गया है।

संघ प्रमुख ने अपने सम्बोधनों में भले ही खुलकर किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के बारे में कुछ न कहा हो, मगर हर बैठक में वह हिन्दू समाज को एकजुट करने की बात कहते रहे। उन्होंने स्वयंसेवकों को स्पष्ट संकेत दिया कि पिछले आठ दशक से संघ जिन लक्ष्यों को लेकर समाज के बीच कार्य कर रहा है, उन्हें पूरा कराने का समय आ गया है।

समाजवादी विचारक विजय नारायण कहते हैं कि चुनाव से करीब एक साल पहले संघ की इस पूरी कसरत के पीछे सिर्फ और सिर्फ मिशन: 2019 का लोकसभा चुनाव है।

समाज के अंतिम पायदान पर खड़े दलितों को जोड़ने का संदेश भी इसी कड़ी का हिस्सा है। संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि इस प्रवास के दौरान पूर्वी क्षेत्र से जुड़े स्वयंसेवकों, पदाधिकारियों को राजनीतिक लक्ष्य साधने का मंत्र दे दिया गया है।

संघ प्रमुख ने संकेतों में साफ किया कि लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर निर्माण और हिंदुत्व के मुद्दे को नई धार दी जाएगी। श­हर-शहर, गांव-गांव एक बार फिर राम मंदिर निर्माण की धुन तेज होगी।

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