आरएसएस, वीएचपी ने सरकार को मंदिर बनाने का ‘वादा’ निभाने के लिए कहा

आरएसएस, वीएचपी ने सरकार को मंदिर बनाने का ‘वादा’ निभाने के लिए कहा

नई दिल्ली: आरएसएस के कार्यकारी प्रमुख सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी ने रामलीला मैदान में दर्शकों को बताया कि ‘आज सत्ता में रहने वालों’ को लोगों की बात सुनना चाहिए और मंदिर का वादा पूरा करना चाहिए। रामलीला मैदान में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की एक रैली में बोलते हुए आरएसएस के सरकार्यवाह ने कहा, ‘जो आज सत्ता में हैं, उन्होंने राम मंदिर बनाने का वादा किया था. उन्हें लोगों की बात सुननी चाहिए और अयोध्या में राम मंदिर की मांग को पूरा करना चाहिए और कहा कि इस मामले पर देरी की वजह से उनका धैर्य खत्म होते जा रहा है।

उन्होने कहा कि हम अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं,” “देश ‘राम राज’ चाहता है।” हम भीख नहीं मांग रहे हैं। संसद के शीतकालीन सत्र से कुछ दिन पहले विश्व हिंदू परिषद की रैली में रविवार को कुछ अनुमानों के मुताबिक, एक लाख से ज्यादा लोग – उनमें से, उत्तरी राज्यों की बड़ी संख्या में युवा लोग इस कार्यक्रम में भाग लिए थे।

अयोध्या में संबंधित भूमि के मालिकाना हक का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. अदालत अगले साल जनवरी में इस मामले की सुनवाई के तारीख की घोषणा करेगी. लेकिन यह विवाद पिछले 25 साल से अनसुलझा है. दक्षिणपंथी संगठनें केंद्र सरकार से अदालत से परे जा कर मंदिर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की मांग कर रहे हैं. रैली में हरिद्वार के स्वामी हंसदेवाचार्य ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘चेतावनी’ देते हुए कहा कि हम उन्हें तब तक सीट से उतरने नहीं देंगे जब तक राम मंदिर बन नहीं जाता. उन्हें जरूर अपना वादा पूरा करना चाहिए.

जोशी के अलावा वीएचपी अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे और इसके अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार भी इस रैली को संबोधित कर सकते हैं.
रामलीला मैदान में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और ऊंची जगहों पर स्नाइपर तैनात किए गए हैं. इस रैली के लिए वीएचपी ने लोगों के घर-घर जाकर प्रचार अभियान चलाया था.

वीएचपी के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, ‘राम मंदिर के निर्माण के लिए जो लोग विधेयक लाने के पक्ष में नहीं हैं, यह जबरदस्त रैली उन लोगों का हृदय परिवर्तन करेगी.’ संगठन ने मंदिर के अपने अभियान के पूर्व के चरणों में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्य के राज्यपालों से मुलाकात की थी. आने वाले चरण में वे मंदिरों और मठों में धार्मिक अनुष्ठान और प्रार्थना आयोजित करेंगे. इस अभियान का समापन प्रयाग में साधु-संतों की धर्म संसद’ के साथ होगा. अंतिम ‘धर्म संसद’ 31 जनवरी और एक फरवरी को आयोजित होगी.

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