Tuesday , September 25 2018

RTI में हुआ खुलासा: बीआरडी मेडिकल कॉलेज में थी ऑक्सीजन की कमी

एक आरटीआई में खुलासा हुआ है कि 11 अगस्त 2017 की रात को गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी थी. उस रात इन्सेफेलाइटिस की वजह से 30 बच्चों की मौत हुई थी. 19 अप्रैल 218 को बीआरडी प्रशासन ने आरटीआई का जवाब देते हुए कहा था कि करीब 6 सिलेंडर अन्य हॉस्पिटल से मंगाए गए थे. जबकि उस वक्त विभाग के नोडल अधिकारी डॉ कफील खान ने अपने प्रयास से चार सिलेंडर का बंदोबस्त किया था.

9 फ़रवरी 2018 को दाखिल की गई आरटीआई के जवाब में बीआरडी प्रशासन ने कुछ हद तक डॉ कफील के स्टैंड की पुष्टि की है. बता दें डॉ कफील ने कहा था कि ऑक्सीजन की कमी थी, क्योंकि बीआरडी प्रशासन ने सप्लायर पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड को समय पर भुगतान नहीं किया था.

बता दें आरटीआई को लखनऊ के एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने दाखिल की थी. संजय शर्मा का कहना है कि सरकार मामले में कुछ तथ्य छुपाने की कोशिश कर रही थी. मीडिया से बातचीत में संजय शर्मा ने कहा, “बीआरडी प्रशासन के जवाब से यह बात साफ हो गई है कि 11 अगस्त की रात ऑक्सीजन की कमी थी.” उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ सही था तो क्यों जांच रिपोर्ट को सार्वजानिक नहीं किया गया.

गौरतलब है कि मामले में आरोपी डॉ कफील आठ महीने के बाद जमानत पर बाहर हैं. डॉ कफील का कहना है कि बच्चों की मौत के लिए सरकार जिम्मेदार थी. उन्होंने कहा कि सरकार ने मेरे और मेरे परिवार की जिंदगी को एक बुरा सपना बना कर रख दिया है. मुझे सरकार के द्वारा फंसाया गया है. 10 अगस्त की रात को जो कुछ भी हुआ वह किसी नरसंहार से कम नहीं था. इसके लिए वे सभी दोषी हैं जिन्होंने 6 महीने में पुष्पा सेल्स द्वारा भुगतान के लिए दिए गए 14 रिमाइंडर को नजरंदाज किया.

उन्होंने कहा कि यह इसलिए हुआ क्योंकि जो लोग लखनऊ में बैठे थे उन्होंने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. मुझे जेल में इसलिए भेज दिया गया क्योंकि कुछ लोगों को डर था कि मैं सच बोल दूंगा.
डॉ कफील ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि एक न एक दिन सच सामने आएगा और दोषी जेल की सलाखों के पीछे होंगे. हमारी सभी उम्मीदें न्यायपालिका पर टिकी हैं.

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