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सैफुल्लाह एनकाउंटर: ATS पर जबरन गवाह बनाने का आरोप, दे रही है आतंक के मामले में फंसाने की धमकी

यूपी की राजधानी लखनऊ में हुए सैफुल्लाह एनकाउंटर में एनआईए और एटीएस पर गंभीर आरोप लग रहे हैं।

रिहाई मंच ने कानपुर के आतिफ के बयान के आधार पर आरोप लगाया है कि यूपी एटीएस और एनआईए मुस्लिम युवकों को डि-रेडिकलाइजेशन के नाम पर जबरन मुकदमों में गवाह और मुखबिर बना रही हैं।

रिहाई मंच की तरफ से बुधवार को यूपी प्रेस क्लब में आयोजित कांफ्रेंस में आतिफ ने बताया कि सात मार्च के बाद से एटीएस और एनआईए सैफुल्लाह से उसके संबंध को लेकर प्रताड़ित कर रही हैं। पूछताछ के नाम पर उसे परेशान किया गया।

आतिफ ने कहा कि जांच एजेंसी के लोग उसे कभी कानपुर तो कभी लखनऊ कार्यालय बुलाते हैं। इस वजह से कारोबार बर्बाद हो गया। आतंकी होने के शक में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ बयान देने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। यहां तक कि सादे कागज पर साइन करवाए गए।

आतिफ का आरोप है कि कानपुर के रेल बाजार थाने में मनीष सोनकर ने सैफुल्लाह और उसके साथियों से मिले होने की बात कुबूल न करने पर बीवी और उसके पेट में पल रहे बच्चे को मारने की धमकी दी। इसके अलावा पूरे परिवार को आतंकवाद के आरोप में फंसाने की बात कही।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुएब का कहना है कि जांच और सुरक्षा के नाम पर ये एजेंसियां लोगों पर दबाव बनाकर झूठे साक्ष्य देने के लिए मजबूर कर रही हैं।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि रेडिकलाइज करने वाली वेब साइटों को प्रतिबंधित क्यों नहीं किया जा रहा है।

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