जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले की जांच में सऊदी अरब ने रुकावट डाली है- संयुक्त राष्ट्र जांच टीम

जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले की जांच में सऊदी अरब ने रुकावट डाली है- संयुक्त राष्ट्र जांच टीम

संयुक्त राष्ट्र संघ का कहना है कि वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले की जांच में सऊदी अरब ने रुकावट डाली है और सऊदी सरकार की ओर से इस हत्या कांड की जांच करने की तुर्की की क्षमता को कम और कमज़ोर करने की रियाज़ सरकार ने गंभीर कोशिश की है।

ख़ाशुक़जी हत्या मामले में सामने आने वाली संयुक्त राष्ट्र संघ की आरंभिक रिपोर्ट में कहा गया कि इस्तांबूल में सऊदी वाणिज्य दूतावस में जहां पत्रकार की हत्या की गई थी 13 दिन तक जाने की अनुमति नहीं दी गई।

पिछले साल 2 अकतूबर को ख़ाशुक़जी को वाणिज्य दूतावास में बुलाकर बेदर्दी से क़त्ल कर दिया गया था। 59 वर्षीय जमाल ख़ाशुक़जी सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की नीतियों पर टिप्पणी करने लगे थे।

parstoday.com के अनुसार, इस समय इस हत्या कांड की जांच संयुक्त राष्ट्र संघ की टीम कर रही है। एजनेस कालमार्ड के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र संघ की जांच टीम ने 28 जनवरी से 3 फ़रवरी तक तुर्की का दौरा किया। आरंभिक रिपोर्ट में जांच टीम का कहना है कि ख़ाशुक़जी सऊदी अधिकारियों के निर्दयतापूर्ण और पूर्व नियोजित षडयंत्र का निशाना बने।

कालमार्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि हालांकि ख़ाशुक़जी की हत्या 2 अकतूबर को हुई लेकिन संबंधित अधिकारियों को वाणिज्य दूतावास के भीतर जाने की अनुमति 15 अकतूबर को दी गई और कूटनयिक के आवास की तलाशी की अनुमति 17 अकतूबर को दी गई इससे विशेष रूप से फ़ोरेन्सिक जांच प्रभावित हुई।

कालमार्ड ने इस हत्या कांड में सऊदी अरब की ओर से 11 संदिग्ध लोगों पर मुक़द्दमा चलाने के दावे टिप्पणी करते हुए इस मुक़द्दमे की पारदर्शिता पर बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि मैंने सऊदी अरब का सरकारी दौरा करने की मांग की है ताकि वहां के अधिकारी मुझे प्रत्यक्ष रूप से सुबूत उपलब्ध कराएं।

जांच रिपोर्ट के अनुसार ख़ाशुक़जी की लाश अब तक नहीं मिली है जिससे उनके परिजनों की पीड़ा और भी बढ़ गई है। आख़िरी जांच रिपोर्ट आगामी जून महीने में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार संस्था को दी जाएगी।

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