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भारतीय स्टेट बैंक की लापरवाही, चालान पर लगा डाली 32 फरवरी की सील

भोपाल: भारत में बैंकिंग क्षेत्र में जाना-माना नाम एसबीआई जिसके देश की हजारों शाखाओं में लाखों कस्टमर्स हैं। बैंक के जुड़े डॉक्युमेंट्स को एक प्रूफ के नाते हर व्यक्ति संभाल के रखता है की पता लगाया जा सके की किस तारीख में क्या ट्रान्सेस्क्शन हुए हैं। लेकिन जब बैंक ही ऐसे रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर दे तो क्या किया जाए ?

भोपाल के अनूपपुर जिले में एसबीआई बैंक ने एक हफ्ते पहले नगरपालिका में ठेकेदारों के भुगतान के लिए बाउचर बनाये थे। जिसके भुगतान के लिए इन्हें एसबीआई बैंक में भेजा गया और बैंक ने अपनी रिसीप्ट पर 32 फरवरी की भुगतान की तारीख डाल दी। जी हाँ हम सब जानते हैं की फरवरी में सिर्फ 28 दिन ही होते हैं और फरवरी का महीना न भी हो तो हर महीने में 31 से ज्यादा दिन नहीं होते हैं।

लेकिन क्या बैंक में इस तरह की लापरवाही को नजरअंदाज किया जाना चाहिए। जबकि बैंक की सील ही इस बात का प्रमाण होती है कि ट्रांसेक्शन किस तारीख में हुआ। जब इस गड़बड़ी के बारे में बैंक से पूछा गया तो बैंक ने इसे क्लेरिकल एरर का नाम देते हुए मामले को तूल न देने की बात कही है। लेकिन बैंक की इस गलती पर कई सवाल उठ रहे हैं की सील लगने के दौरान बैंकिग स्टाफ एकाउंटेंट बाकायदा रकम व चलान के बाउचरों की जांच-पडताल करते हैं। यह जांच केवल तारीख और रकम की ही होती है। फिर भी ऐसी लापरवाही कैसे हो सकती है ?

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