मुख्यधारा में लौटने के लिए अपीलों को नजरअंदाज कर विद्वान मन्नान वानी बना था चरमपंथ

मुख्यधारा में लौटने के लिए अपीलों को नजरअंदाज कर विद्वान मन्नान वानी बना था चरमपंथ

जम्मू कश्मीर में सेना और आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए हैं। इन दोनों में से एक आतंकी की पहचान हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर मन्नान वानी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मन्नान वानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का पूर्व स्टूडेंट था। वानी इसी साल एएमयू से लापता हुआ था। बाद में खबर आई कि वह आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया था।

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने कहा की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवेर्सिटी का पीएचडी छात्र व हिजबूल कमांडर, मुनान बशीर वानी जनवरी में आतंकवादी संगठन में शामिल हुआ था। वह भी एक अन्य मुतभेड़ में मारा गया। वानी कुपवाड़ा के लोलाब इलाके का रहने वाला था।

समाचार फैलाने के बाद जिले के कुछ इलाकों में संघर्ष शुरू हो गया। बुरहान वानी की हत्या के बाद से एक क्यू लेते हुए, इंटरनेट सेवा को अवरुद्ध कर दिया गया है और कुपवाड़ा जिले में सभी शैक्षिक संस्थानों को सावधानी पूर्वक उपाय के रूप में बंद कर दिया गया है।

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शोध विद्वान, मन्नान वानी इस साल की शुरुआत में हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गए थे। वह उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय से गायब हो गए थे, जहां वह एप्लाइड जियोलॉजी का अध्ययन कर रहा था। कुछ दिनों बाद, उनकी तस्वीर, एके 47 राइफल के साथ सोशल मीडिया पर दिखाई दी।

आतंकवादी समूह में शामिल होने के उनके फैसले ने दोस्तों को चौंका दिया था। एक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कैसे उन्होंने हमेशा मन्नान वानी को नागरिक सेवाओं के लिए तैयार करने की उम्मीद की थी, दूसरे ने एक पेपर को संदर्भित किया था, जिसने उन्हें 2016 में भोपाल में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पहला पुरस्कार जीता था। हिजबुल में शामिल होने के बाद भी, मन्नान वानी अपने फैसले को न्यायसंगत साबित करने के लिए लेख लिख रहे थे कि उन्होंने पेन पर बंदूक क्यों चुना।
गौरतलब है कि फेसबुक पर फोटो अपलोड करने के लिए अपने जुनून के कारण हिजबुल मुजाहिदीन के ज्ञात चेहरों में से एक बुरहान वानी की हत्या के बाद 2016 में कश्मीर घाटी में छह महीने तक हिंसा देखी गई थी।

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