तुर्की: एर्दोगन को बहुत बड़ा झटका, विपक्ष की बड़ी जीत!

तुर्की: एर्दोगन को बहुत बड़ा झटका, विपक्ष की बड़ी जीत!

तुर्की के सत्ताधारी दल के खिलाफ इस्तांबुल में विपक्षी दल का दोबारा जीतना असल में लोकतंत्र के लिए एक अहम जीत है। डॉयचे वेले के एरकान अरिकान का कहना है कि इससे देश के राजनीति में बदलाव का मंच तैयार होने की संभावना बनेगी।

डी डब्ल्यू हिन्दी पर छपी खबर के अनुसार, इस्तांबुल में दोबारा कराए गए चुनावों में पहली बार से भी ज्यादा लोगों ने मतदान किया और देश के सत्ताधारी दल एकेपी के उम्मीदवार और पूर्व प्रधानमंत्री बिनाली यिल्दिरिम को हराकर विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के एकरम इमामुग्लू को विजयी बनाया।

23 जून 2019 की तारीख तुर्की के इतिहास में दर्ज होने लायक है। पिछली बार के चुनाव में जो तेरह हजार वोटों के अंतर से जीता था, इस बार उसे लोगों ने करीब आठ लाख वोटों से जिताया है।

तुर्की के लोगों के लिए यह एक इशारे से कुछ ज्यादा है। यह जागने की घंटी है। तुर्की में लोकतंत्र अब भी जिंदा है। इसका एक सबूत इमामुग्लू की जीत है, जिन्हें उनके विरोधियों ने पूरे चुनाव अभियान के दौरान अपमानित किया लेकिन जिन्हें जीत के बाद तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन समेत वे सब बधाई देने को मजबूर हो गए।

राष्ट्रपति एर्दोआन के लिए यह हार गाल पर तमाचे की तरह है। उनके बस में जो कुछ भी था वो लगाकर उन्होंने अपनी पार्टी के उम्मीदवार को जिताने का जोर लगाया था। यहां तक की सर्वोच्च चुनावी परिषद पर भी दबाव बनाया लेकिन मतदाताओं के हाथों उन्हें मुंहकी खानी पड़ी।

कुर्द लोगों का वोट पाने के लिए इस बार भी एकेपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन कुर्द समर्थक पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपने समर्थकों का इमामुग्लू को वोट देने के लिए आह्वान किया। तुर्की में पहली बार लोगों ने साफ तौर पर दिखाया है कि वे लोकतंत्र चाहते हैं।

जब से चुनाव की तारीख घोषित हुई थी तब से इस्तांबुल के निवासियों से अपील होने लगी थी कि वे छुट्टियों में घूमने ना निकल जाएं बल्कि मतदान के लिए वहीं रुकें।

लोगों ने चार्टर्ड बसों और कार-पूलिंग जैसे यातायात के कई इंतजाम किए, जिससे उन्हें इस्तांबुल लाकर वोट डलवाया जा सके। बाहर से केवल वोट डालने आने वालों की तादाद के करीब 15 लाख होने का अंदाजा लगाया जा रहा है।

ये लोग केवल एक दिन के लिए यहां अपना वोट डालने पहुंचे थे। एक टैक्सी ड्राइवर ने बताया, “मैंने हमेशा एकेपी को वोट डाला है। इस बार ऐसा नहीं करुंगा। हमें न्याय चाहिए। हम आस्तिक लोग हैं कोई पाखंडी नहीं!”

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