Monday , December 18 2017

Shariah courts गैर कानूनी, फतवे कुबूल करना पाबंदी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पीर को एक अहम फैसला सुनाया है सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शरई अदालतों (Shariah courts) को कानूनी मंज़ूरी नहीं है | शरयीत अदालतों की ओर से दिए जाने वाले फतवों को कुबूल करना पाबंदी नहीं है |

सुप्रीम कोर्ट ने पीर को एक अहम फैसला सुनाया है सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शरई अदालतों (Shariah courts) को कानूनी मंज़ूरी नहीं है | शरयीत अदालतों की ओर से दिए जाने वाले फतवों को कुबूल करना पाबंदी नहीं है |

दिल्ली के वकील विष्णु लोचन मदान की दरखास्त पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया | अदालत ने कहा कि कोई भी मज़हब किसी के बुनियादी हुकूक को दबाने की इज़ाज़त नहीं देता | लोचन ने अपनी दरखास्त में कहा था कि दारूल कजा और दारूल-इफ्ता जैसे इदारे मुतावाज़ी (Parallel) अदालतें चला रहे हैं | लोचन का कहना था कि शरीयत अदालतें गैर कानूनी है | ये मुसलमानो की सामाजी और मज़हब की आज़ादी पर फैसले करती है |

मुसलमानो के बुनियादी हुकूक को काबू नहीं किया जा सकता | मुस्लिम तंज़ीमों की ओर से मुकर्रर काजी और मुफ्तियों की ओर से दिए जाने वाले फतवे मुसलमानों के बुनियादी हुकूक को कम नहीं कर सकते | इस साल फरवरी में कोर्ट ने अपना फैसला महफूज़ रखा था | सुप्रीम कोर्ट ने तब्सिरा किया था कि मौलवियों की ओर से जारी फतवों और मज़हबी अहकामात में मुदाखिलत नहीं कर सकता | अदालत ने कहा था कि ये मज़हबी और सियासी मसले हैं |

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