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ऐसा औरंगजेब हर मुसलमान के घर पैदा हो : शिवसेना

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर शिवसेना के हमलावर रुख में कोई नरमी नहीं आई है। जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना के जवान औरंगजेब की शहादत पर शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में रक्षा मंत्री को सबसे कमजोर बताते हुए निशाना साधा गया है।

वहीं, इस लेख में शहीद हुए राष्ट्रीय राइफल्स के जवान औरंगजेब की जमकर प्रशंसा की गई है। सामना में लिखा गया कि ऐसा औरंगजेब देश के हर मुसलमान के घर पैदा होना चाहिए। ईद की छुट्टी पर घर जा रहे औरंगजेब को आतंकियों ने अगवा कर लिया था। गुरुवार शाम को उनका शव मिला था।

सामना के संपादकीय में लिखा गया, ‘किसी भी संकट का मुकाबला करने के लिए हमारी फौज हमेशा मुस्तैद रहती है, तीनों सेना दल के प्रमुख ऐसा कहते रहते हैं मगर कश्मीर में आतंकवादियों का उत्पात देखते हुए देश में सचमुच रक्षामंत्री हैं क्या? ऐसा सवाल मन में उठता रहता है। अत्यंत दुर्बल और निष्क्रिय, बिना चेहरेवाली व्यक्ति को रक्षामंत्री के पद पर बैठाकर हम देश का नुकसान कर रहे हैं।’

सामना के संपादकीय में औरंगजेब की शहादत को अमर बताते हुए लिखा गया, ‘देश के मुसलमानों को ही नहीं बल्कि हिंदुओं को भी औरंगजेब की शहादत पर सलाम करना होगा। औरंगजेब युवा फौजी जवान थे, लीडर थे। देश के लिए शहीद हुए।

मुगल सुल्तान औरंगजेब के महाराष्ट्र की कब्र पर नमाज अदा कर वोटों का ठेका लेने वाले कश्मीर में औरंगजेब की कब्र के सामने नतमस्तक हों। हम उनकी शहादत को झुककर नमन कर रहे हैं। उनकी कब्र पर फूल अर्पित कर उसे आंसुओं से सींच रहे हैं। ऐसा औरंगजेब इस देश के हर मुसलमान के घर में पैदा होना चाहिए। इस औरंगजेब की शहादत अमर है।’

संपादकीय में जवान औरंगजेब की शहादत का जिक्र करते हुए आगे लिखा है, ‘हिंदुस्तान की सैन्य क्षमता पर हमें पूरा विश्वास है लेकिन नेतृत्व कमजोर है। यदि ऐसा नहीं होता तो ऐन रमजान के महीने में बहादुर जवान औरंगजेब की हत्या करने की हिम्मत आतंकियों ने नहीं की होती।

एक औरंगजेब की कब्र महाराष्ट्र की मिट्टी में ही बनाई गई है। औरंगजेब, इस नाम का जितना तिरस्कार और द्वेष महाराष्ट्र ने किया अन्य किसी ने नहीं किया होगा लेकिन हम एक दूसरे औरंगजेब की मोहब्बत में पड़ गए हैं। उनकी वीरता और शहादत इस देश के लिए प्रेरणादायी है। कश्मीर का ये औरंगजेब शहीद हो गया।’

शिवसेना के मुखपत्र में शहीद औरंगजेब की तारीफ करते हुए आगे लिखा गया, ‘हत्या से पहले आतंकियों ने उनका एक विडियो वायरल किया था। उसमें भी औरंगजेब कहीं पर भी हताश या शरणगत नहीं दिखाई दे रहे थे।

उनके चेहरे पर भय की कोई रेखा नहीं दिखाई दी। वह उनकी शरण में नहीं गए और निडरता से देश के लिए शहीद हो गए। उनकी शहादत से रमजान माह और पवित्र हो गया।’
(साभार: नवभारत टाइम्स)

 

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