Sunday , July 22 2018

शोपियां मुठभेड़: गोलीबारी में मरने वालों की संख्या छह हुई

दक्षिण कश्मीर के एक गांव में रविवार शाम को मुठभेड़ में दो आतंकवादियों समेत छह लोगों की मौत हो गई थी। दक्षिण कश्मीर के शोपियां में लोगों ने अपने घरों से निकलकर घटना के विरोध में पथराव किया और इस दौरान लोगों और जवानों के बीच कई बार झड़प भी हुई। सुरक्षाबलों का कहना है कि मारे गए लोग आतंकवादी थे जबकि अलगाववादी नेताओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें से चार स्थानीय नागरिक थे।

पुलिस ने बताया कि रविवार रात को चार लोगों के मरने की पुष्टि की गई जबकि सोमवार सुबह दो और शव बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक उसे गोलीबारी स्थल से छह किलोमीटर दूर शोपियां के सैदपोरा क्षेत्र से लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी आशिक हुसैन भट का गोलियों से छलनी शव मिला है। वह 13 नवंबर, 2017 से लापता था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि भट की मौत पहनू गांव में रविवार को मुठभेड़ की वजह से हुई है।

मुठभेड़ स्थल से करीब 250 मीटर की दूरी पर सोमवार सुबह एक अन्य स्थानीय नागरिक गौहर अहमद लोन (24) का शव भी बरामद किया गया। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासीन मलिक ने इन मौतों के विरोध में घाटी में बंद और प्रदर्शनों का आह्वान किया। प्रशासन ने बंद के बीच सड़कों पर प्रदर्शनों की आशंका के मद्देनजर श्रीनगर के कुछ हिस्सों और दक्षिण कश्मीर में प्रतिबंध लगा दिया।

लश्कर कमांडर अशिक हुसैन भट के जनाजे में भाग लेने के लिए शोपियां जिले के कापरान गांव में लोग एकत्रित हुए। आतंकवादियों ने अपने मृतक सहयोगी के सम्मान में हवा में फायरिंग भी की। घटना के विरोध में अनंतनाग और पुलवामा जिले, उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले, मध्य कश्मीर के बडगाम में प्रदर्शन हुए, जहां दौरान युवकों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुईं।

जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक को सोमवार को इन मौतों के विरोध में निकाले गए मार्च के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने मलिक के विरोध मार्च को रोका और उन्हें और उनके कुछ समर्थकों को हिरासत में ले लिया। मलिक ने मीडिया को बताया कि नागरिकों की मौत के लिए राज्य के तमाम विधायक जिम्मेदार हैं।

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