सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ सुशांत सिंह पहुंचे जामिया

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‘हम सब अभी तक धर्मनिरपेक्षता का जीता जागता नमूना थे, लेकिन जब सरकार ने इसे तोड़ने की कोशिश की तो सबसे पहले स्टूडेंट्स ने ही बोलना शुरू किया। आज इन्हीं की बदौलत लोग सड़कों पर उतरे हैं, अन्याय के खिलाफ अपने स्वर मुखर कर रहे हैं। ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया के स्टूडेंट्स की हौसलाअफजाई में यह कहते हुए सुशांत ने कहा, मेरा पूरा परिवार अन्याय के खिलाफ हो रहे इस संघर्ष में मेरे साथ है, तभी मैं यहां तक आया हूं। सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ जामिया के स्टूडेंट्स के आंदोलन के 37वें दिन शनिवार को बड़ी तादाद में स्टूडेंट्स जमा हुए। इनमें दूरदराज से आए स्टूडेंट्स और लोग शामिल थे। जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी की ओर से ‘सर्व धर्म प्रार्थना’ का आयोजन किया।

जामिया गेट 7 के आगे रौनक देखने लायक थी। शनिवार होने की वजह से लोग परिवार के साथ यहां पहुंचे। नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, बरेली जैसे शहरों से भी आए लोगों ने जामिया के स्टूडेंट्स को अपना साथ दिया। बरेली से यहां आए अहमद हसन अपने दो बेटों के साथ यहां पहुंचे। वह कहते हैं, मेरा बेटा क्लास 11 में है। मैं उसे यहां इसलिए लाया हूं कि वो जामिया भी देखे और वहां के सुलझे स्टूडेंट्स भी। मैं चाहता हूं कि वो इनकी तरह पढ़े-लिखे, अच्छा काम करे और गलत के लिए आवाज भी उठाए। मैंने टीवी, सोशल मीडिया पर इन बच्चों को सुना है, ये लोकतंत्र को भी समझते हैं और इंसानियत को भी।

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से यहां पहुंचे लॉ स्टूडेंट रुद्र यादव भी अपने दोस्तों के साथ जामिया पहुंचे। वह कहते हैं, मुझे सीएए-एनआरसी का ज्यादा पता नहीं था, लेकिन जामिया के स्टूडेंट्स के प्रदर्शन के बाद इसे पढ़ा और सुना। मुझे लगता था कि ऐतराज क्यों है, आज भी सवाल साफ नहीं हो पाया है। मगर यहां इसलिए हूं, क्योंकि जामिया के स्टूडेंट्स बात कर रहे हैं, लड़ाई नहीं। वो खुद को तरह तरह से समझा रहे हैं। यहां एक फोटो एग्जिबिशन लगी है, जिसमें जेएनयू और जामिया के प्रदर्शन की तस्वीरें हैं। उसे देखकर मुझे यही लगा कि उन्हें सरकार सुन नहीं रही है। उन पर पुलिस एक्शन हो रहा है और यह तो एक डेमोक्रेटिक देश में नहीं होना चाहिए।

शनिवार को लेखिका फराह नकवी, शहीद भगत सिंह के भतीजे प्रो जगमोहन सिंह, अब्दुल हमीद के पौत्र डॉ मोहम्मद जावेद और केरल के वित्त मंत्री टी. एम. थॉमस इसाक भी पहुंचे। लेखिका फराह नकवी ने कहा कि शाहीन बाग की महिलाएं देश के पीएम को चाय पर चर्चा के लिए आमंत्रित कर रही हैं। वह आएं और हमसे मिलकर बताएं कि वो देश की मुस्लिम महिलाओं की फिक्र करते हैं। जामिया में पिछले 18 दिनों से लगातार चली आ रही सत्याग्रही भूख हड़ताल शनिवार को भी जारी रही।