Tuesday , December 12 2017

मोदी लहर में भी चुनाव जीतने वाले सपा विधायक आलमबदी को सादगी की मिसाल माना जाता है

आजमगढ़: समाजवादी पार्टी के नेता आलमबदी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सादगी की मिसाल माने जाते हैं। यही वजह है कि यूपी विधानसभा चुनाव में जहां अच्छे-अच्छे धुरंधर मोदी लहर में बह गए वहीं आलमबदी ने आजमगढ़ की निजामाबाद सीट पर भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की है।

निजामाबाद सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे आलमबदी ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वि बसपा के चंद्रदेव राम को 18,529 वोटों से मात दी। उन्हें कुल 67,274 वोट जबकि चन्द्रदेव राम को 48,745 वोट मिले। वे पूरे सूबे में अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं। कहा जाता है कि आज की राजनीति ऐसा शायद ही ऐसा कोई है जो तीन बार विधायक रहने बाद टिनशेड के घर में रहता है।

आलमबदी आज भी अपने फर्नीचर की एक पुरानी दुकान पर बैठते हैं। कहा जाता कि वे राजनीति में आने से पहले बिजली विभाग में एक जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम करते थे।

लेकिन इंजीनियर की नौकरी छोड़कर उन्होंने एक वेल्डिंग की दुकान खोल ली। उसके बाद उन्होंने साल 1996 में पहली बार समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा और विधायक बने। उसके बाद फिर दोबारा उन्होंने चुनाव जीता और 2002 में विधायक बनकर विधानसभा गए। लेकिन साल 2007 में जब चुनाव हुआ तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उसके बाद 2012 में उन्होंने फिर चुनाव लड़ा और बारी मतों से जीत दर्ज की।

उनके बारे में यह बाद बहुत मशहूर है कि वे कभी भी किसी पार्टी से टिकट मांगने नहीं जाते। बताया जाता है कि अब तक इन पर किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। जानकार बताते हैं कि अब तक उनके पास कोई वाहन नहीं था। वे पैदल ही चुनाव प्रचार करते थे। यही उनकी सादगी है जिसे उनके इलाके के लोग उन्हें बेहद पसंद करते है। लेकिन अब उन्होंने एक बोलेरो ले ली है।

उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि आलमबदी की ईमानदारी से इनकी विधायकनिधि से काम करने वाले ठेकेदार भी घबराते हैं। वे अपने विधानसभा क्षेत्र में बनने वाली सड़कों को खुद बैठकर बनवाते हैं। जब चुनाव जीतने के बाद उन्हें सुरक्षा के लिए दो गनर दिया गया उन्होंने उसमें से एक को लौटा दिया। उन्होंने उसके लिए तर्क दिया कि एक आदमी के लिए दो गनर की जरूरत नहीं है।

 

TOPPOPULARRECENT