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मुहम्मद अली की सजा को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया था, फिर ट्रम्प की माफी पर कैसा विचार?

हैदराबाद – संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि वह देर से ही सही पर हेवीवेट मुक्केबाजी चैंपियन मुहम्मद अली सहित कुछ 3,000 लोगों को क्षमा करने पर विचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा “हमारे पास 3,000 नाम हैं। हम उन्हें देख रहे हैं। 3,000 नामों में से, उन नामों में से कई को गलत तरीके से ट्रीट किया गया है,”

ट्रम्प ने कहा कि वह अली के लिए माफ़ी पर विचार कर रहे हैं, जो 2016 में इस दुनिया से चल बसे थे। बॉक्सर ने 1967 में अमेरिकी सेना में शामिल होने से इंकार कर दिया था, ईमानदार ऑब्जेक्टर्स की स्थिति का दावा किया और पांच साल की सजा सुनाई गई।

ट्रम्प ने कहा, “मैं जिस के बारे में सोच रहा हूं आप सभी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, और वह बहुत पहले गुजर गया और वह तब बहुत लोकप्रिय नहीं था।”

ये तो हुई ट्रम्प की बात अब हम जानते हैं मोहम्मद अली के बारे में जिसके बारे में खामाखा ट्रम्प माफी की बात कर रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं था कि क्यों ट्रम्प माफी पर विचार करेगा, क्योंकि अली की सजा को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया था। वह कभी भी जेल में नहीं गए, जबकि उनका मामला अपील में था और 1971 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बदल दिया था।

अली को महानतम बनाने में रिंग के बाहर की बातों का ज्यादा योगदान रहा। सिविल राइट के दौर में उनकी निजी जिंदगी में काफी उथल-पुथल मची। मोहम्मद अली का असली नाम दरअसल कैसियस क्ले था। क्ले 19वीं सदी में गुलामी के खिलाफ अभियान चलाने वाले एक किसान थे।

अमेरिका में नस्लभेद की समस्या से परेशान अली ने आखिरकार इस्लाम धर्म कबूल कर लिया। लेकिन यहां से उनकी परेशानी कम होने की बजाए बढ़ गई। वियतनाम युद्ध में अमेरिकी सेना के साथ जाने से अली के मना करने पर उनका हैविवेट टाइटल छीन लिया गया। बॉक्सिंग लाइसेंस और पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। नतीजा ये हुआ के अपने करियर के सबसे अहम दौर में उन्हें करोड़ों का नुकसान तो हुआ ही 5 साल जेल की सजा सुना दी गई।

मोहम्मद अली की लड़ाई अपने पहले हैविवेट चैंपियनशिप से पहले ही शुरू हो चुकी थी। अली के दबदबे का ऐसा आलम रहा कि 1962 में 8 मौके पर जो उन्होंने अपनी जीत की जैसी भविष्य-वाणी की, उसमें से 7 सच साबित हुई।

मोहम्मद अली सिर्फ एक मुक्केबाज ही नहीं थे। वो एक क्रांतिकारी भी थे। अली रिंग में जितने फैन बनाए, रिंग के बाहर भी उनसे उतने ही लोग जुड़े। चाहे वियतनाम युद्ध के खिलाफ उनकी मुहिम हो या फिर नस्लभेद के खिलाफ लड़ाई। लोगों से जुड़े हर मसले को खुलकर उठाने की हिम्मत ने ही उन्हें पीपुल्स चैंपियन बनाया।

दुनिया का महानतम फाइटर, एक अद्भुत चैंपियन, ऐसा आखिर कब होता है जब दुनिया के बोलने से पहले कोई खुद को महानतम कहे। मोहम्मद अली…ये नाम ही काफी है। एक ऐसी हस्ती, जिसने खुद को अद्वितिय बताया और पूरी दुनिया ने उसे अद्वितिय माना। अली को सिर्फ बॉक्सिंग का बादशाह कहना उनके कद को बौना करना है। रिंग के बाहर के करिश्मे ने अली को दुनिया की महानतम हस्तियों में शुमार किया।

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