Saturday , September 22 2018

गलत रिपोर्टिंग हो सकती है, इसके लिए मीडिया को मानहानि के लिए नहीं पकड़ना चाहिए- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने टिप्पणी की है कि प्रेस की बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी ‘पूर्ण’ होनी चाहिए और ‘कुछ गलत रिपोर्टिंग’ होने पर मीडिया को मानहानि के लिए नहीं पकड़ा जाना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने एक पत्रकार और मीडिया हाउस के खिलाफ मानहानि की शिकायत निरस्त करने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इंकार करते हुए यह टिप्‍पणी की।

पीठ ने कहा, ‘‘लोकतंत्र में, आपको (याचिकाकर्ता) सहनशीलता सीखनी चाहिए। किसी कथित घोटाले की रिपोर्टिंग करते समय उत्साह में कुछ गलती हो सकती है लेकिन हमें प्रेस को पूरी तरह से बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी देनी चाहिए। कुछ गलत रिपोर्टिंग हो सकती है। इसके लिए उसे मानहानि के शिकंजे में नहीं घेरना चाहिए।’’

न्यायालय ने मानहानि के बारे में दंण्डात्मक कानून को सही ठहराने संबंधी अपने पहले के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रावधान भले ही संवैधानिक हो परंतु किसी घोटाले के बारे में कथित गलत रिपोर्टिंग मानहानि का अपराध नहीं बनती है।

इस मामले में एक महिला ने एक खबर की गलत रिपोर्टिंग प्रसारित करने के लिए एक पत्रकार के खिलाफ निजी मानहानि की शिकायत निरस्त करने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।

महिला का कहना था कि गलत रिपोर्टिग से उसका और उसके परिवार के सदस्यों की बदनामी हुई है।

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