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मोदी सरकार पर बरसा सुप्रीम कोर्ट, कहा- हम आपका कचरा उठाने वाले नहीं हैं

Prime Minister Narendra Modi during the Valedictory Session of National Law Day Celebration at vigyan Bhawan on 26th Nov. 2017. Express photo by Renuka Puri

उच्चतम न्यायालय ने देश में ठोस कचरे के प्रबंधन के बारे में आधी अधूरी जानकारी के साथ 845 पेज का हलफनामा दाखिल करने के लिये केन्द्र को उसके समक्ष ‘कचरा’ नहीं डालने की चेतावनी दी. कोर्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत ‘कूड़ा उठाने वाला’ नहीं है. शीर्ष अदालत ने यह सख्त टिप्पणी देश में ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के अमल के मामले की सुनवाई के दौरान केन्द्र के वकीलों द्वारा न्यायालय में इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने की पेशकश किये जाने पर की.

न्यायमूर्ति मदन बी. लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने यह हलफनामा रिकार्ड पर लेने से इंकार करते हुये कहा कि सरकार उसके समक्ष कचरा नहीं डाल सकती है. इस तरह का हलफनामा दाखिल करने का कोई मतलब नहीं है जिसमे ‘कुछ भी नहीं’ हो. पीठ ने सख्त लहजे में केन्द्र के वकील वसीम कादरी से कहा, ‘आप क्या करने का प्रयास कर रहे हैं? आप हमें प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं? हम इससे प्रभावित नहीं हुये हैं. आप सबकुछ हमारे सामने डालना चाहते हैं. हम इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं.’

पीठ ने कहा, ‘यह मत कीजिये. जो भी कूड़ा कचरा आपके पास है, आप हमारे सामने डाल रहे हैं. हम कूड़ा उठाने वाले नहीं हैं. इसके बारे में आप को साफ मालूम होना चाहिए.’ इसके साथ ही न्यायालय ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें यह जानकारी होनी चाहिए कि क्या राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने 2016 के नियमों के अनुसार राज्य स्तर के परामर्श बोर्ड गठित किये हैं. पीठ ने राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में कब परामर्श बोर्ड गठित किये गये, इनके अध्यक्ष और सदस्यों के नाम तथा इनकी बैठकों का विवरण भी हलफनामे में देने का निर्देश केन्द्र को दिया है.

इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही वकील कादरी ने पीठ से कहा कि उसके पिछले साल 22 दिसंबर के आदेश के बाद केन्द्र ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखे थे. इनमें से 22 राज्यों ने अभी तक विवरण भेजा है. उन्होंने कहा कि हलफनामे में इस विवरण को संकलित किया गया है.


हालांकि पीठ ने कहा, ‘आपने 2000 में नियम तैयार किये थे लेकिन किसी ने भी (राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों) इस पर अमल नहीं किया. इसके बाद आप ने 2016 में नियम तैयार किये परंतु ऐसा लगता है कि इसमें किसी की भी दिलचस्पी नहीं है. जब वे इतने आसान मानदण्डों को लागू नहीं कर रहे हैं तो फिर कठोर नियमों को कैसे लागू करेंगे. क्या राज्य केन्द्र सरकार की सलाह मानने के लिये बाध्य नहीं है?’

पीठ ने कहा, ‘आपने इस तरह के नियम क्यों बनाये? आप इन नियमों को वापस ले लीजिये.’ कादरी ने कहा कि मुख्य समस्या भूमि की अनुपलब्धता, विशेषकर दिल्ली में, है. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली विकास प्राधिकरण को भूमि आवंटन करने के लिये पत्र लिखा था और उसने कचरे से ऊर्जा बनाने का संयंत्र लगाने के लिये दक्षिण दिल्ली नगर निगम को 50 एकड़ भूमि आबंटित की.

केन्द्र शासित प्रदेशों के बारे में कादरी की टिप्पणी पर न्यायालय ने कहा कि इनका प्रशासन आपके अंतर्गत आता है. आप इनमें ही अपने नियम लागू नहीं कर पा रहे हैं. कादरी ने कहा कि केन्द्र को आंध्र प्रदेश, असम और बिहार जैसे राज्यों से भी अभी जवाब नहीं मिला है जबकि दिल्ली में ठोस कचरे के प्रबंधन के बारे मे बोर्ड का गठन कर दिया गया है जिसकी दो बैठकें भी हो चुकी हैं. सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्यों ओर केन्द्र शासित प्रदेशों में राज्य स्तर के परामर्श बोर्ड के गठन और उनके स्वरूप के बारे में भी केन्द्र से जानकारी मांगी.

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