तबलीगी जमात ने आज़ादी की लड़ाई में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और गांधी के साथ काम किया- मुस्लिम स्कॉलर

तबलीगी जमात ने आज़ादी की लड़ाई में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और गांधी के साथ काम किया- मुस्लिम स्कॉलर

दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मरकज में देश-विदेश से करीब 1500 से 1700 लोग आए थे। ये सभी लोग एक धार्मिक समारोह में भाग लेने के लिए दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित मरकज में आए हुए थे।

 

इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट इन पर छपी खबर के अनुसार, इसमें हिस्सा लेने वाले कई लोग अपने-अपने राज्यों की तरफ लौट गए थे, जिसके चलते वायरस के फैलने का खतरा बढ़ गया है। यह तो वो खबर है, जो आप लगातार पढ़ रहे होंगे। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि तबलीगी समाज क्या है, ये लोग कौन होते हैं?

 

मुस्लिम स्कॉलर और रिसर्चर अतीक उर रहमान ने बताया कि तबलीग समाज की स्थापना आजादी के आंदोलन के दौरान हुई थी। करीबन 150 मिलियन से ज्यादा इनके फॉलोवर दुनियाभर में हैं।

 

ये सुन्नी समाज के मुस्लिमों में मुस्लिम धर्म के प्रचार का काम करते हैं लेकिन इनके कोई रजिस्टर परमानेंट मेंबर्स नहीं होते हैं। ये शहर-शहर जाकर मरकज मस्जिदों में लोकल लोगों को बुलाकर धर्म का प्रचार करते हैं।

 

अतीक उर रहमान ने बताया कि यह जमात इस्लाम के बेसिक को फॉलो करती है और उसका प्रचार करती है। ये ऐशो आराम की जीवन शैली और विज्ञानवादी सोच नहीं रखते, जिसके कारण मुस्लिम स्कॉलर और पढ़े-लिखे विद्वान इनके विचारों से सहमत नहीं होते हैं।

 

इन लोगों का आजादी के लड़ाई में योगदान रहा है। अबुल कलाम आजाद और गांधी जी के साथ भी इन लोगों की जमात ने काम किया है।

 

उन्होंने बताया कि साउथ ईस्ट एशिया में इनके ज्यादा सेंटर और फॉलोवर्स हैं। इन लोगों से गलती हुई है। अब भी जो लोग विदेश गए या विदेशियों के सम्पर्क में आए, वह सामने आएं। याद कर-कर के बताएं कि वह कहां गए, किन-किन लोगों के संपर्क में आए।

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