Thursday , June 21 2018

Tag Archives: Sahir Ludhiyanwi. Urdu Poems

साहिर की नज़्म: ‘इसलिए ऐ शरीफ इंसानो.. जंग टलती रहे तो बेहतर है’

ख़ून अपना हो या पराया हो नस्ले-आदम का ख़ून है आख़िर जंग मग़रिब में हो कि मशरिक में अमने आलम का ख़ून है आख़िर बम घरों पर गिरें कि सरहद पर रूहे-तामीर ज़ख़्म खाती है खेत अपने जलें या औरों के ज़ीस्त फ़ाक़ों से तिलमिलाती है टैंक आगे बढें कि …

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