तीन तलाक पर अध्यादेश को मोदी सरकार ने मंजूरी दी

तीन तलाक पर अध्यादेश को मोदी सरकार ने मंजूरी दी
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक बार में तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को दंडनीय अपराध बनाने संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है लेकिन यह राज्यसभा में लंबित है। वहां पर सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने ने पिछले वर्ष इस प्रथा पर रोक लगा दी थी। फैसले के दौरान
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से तीन तलाक से संबंधित कानून बनाने को कहा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद भी लगातार तीन तलाक दिए जाने के मामले सामने आ रहे थे। ऐसे में इसे दंडनीय अपराध बनाने के लिए विधेयक लाया गया।

 

मोदी कैबिनेट ने इस बिल में अगस्त माह में तीन संशोधन किए थे। यहां जानें संशोधित तीन तलाक बिल में क्या है खास-

संशोधित तीन तलाक बिल में खास क्या…

1- नए बिल में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामले को गैर जमानती अपराध तो माना गया है लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा। मजिस्ट्रेट चाहे तो ट्रायल से पहले पीड़िता का पक्ष सुनकर आरोपी को जमानत दे सकता है।

2- मजिस्ट्रेट को पति-पत्नी के बीच समझौता कराकर शादी बरकरार रखने का अधिकार होगा। इससे पहले समझौते का कोई प्रावधान नहीं था। मजिस्ट्रेट के सामने अगर समझौता हो जाता है और पत्नी शिकायत वापस ले लेती है तो शादी बरकरार रखी जा सकती है।

3-  अब पुलिस केवल तब एफआईआर दर्ज करेगी जब पीड़ित पत्नी, उसके परिजन या शादी के बाद रिश्तेदार बने किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस से गुहार लगाई जाती है। पहले का प्रावधान था कि इस मामले में पहले कोई भी केस दर्ज करा सकता था. इतना ही नहीं पुलिस खुद की संज्ञान लेकर मामला दर्ज कर सकती थी।

4. यह अध्यादेश 6 महीने तक लागू रहेगा। इस दौरान सरकार को इसे संसद से पारित कराना होगा। सरकार के पास अब बिल को शीत सत्र तक पास कराने का वक्त है।

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