गौरक्षकों के आतंक से तंग आकर अब चमड़ा उतारने वाले दलित काम बंद करने पर हुए मजबूर

गौरक्षकों के आतंक से तंग आकर अब चमड़ा उतारने वाले दलित काम बंद करने पर हुए मजबूर

यूपी में योगी सरकार बनने के बाद सूबे में गौरक्षकों के दल काफी सक्रीय और बेख़ौफ़ हो गए हैं। हालाँकि देखा जाए तो बीजेपी शासित सभी प्रदेशों में इनकी गुंडागर्दी चरम सीमा पर पहुंच गई है। लोग गाय पालने के नाम से भी डर रहे हैं।

वहीँ, मुसलमानों को शक के आधार पर मारने-पीटने के बाद अब मरे जानवरों की खाल उतारने वालों पर भी गौरक्षकों का हमला शुरू हो गया है।

इसी का विरोध करने के लिए मेरठ में मरे जानवरों की खाल उतारने वालों ने धमकी दी है कि अगर उनपर हमले नहीं रुके तो वे इस काम को ही बंद कर देंगे।

चमड़ा कारोबारी ओविंद्र पाल ने इस मामले में कहा कि अब ये काम करने में उनकों जान का खतरा लगा रहता है। पता नहीं कब गौरक्षक हम पर हमला कर दें। मरे हुए जानवरों की खाल को बेचने पर भी खतरा मंडराने लगा है। इस काम के लिए सरकार भी कोई प्रोत्साहन नहीं देती। इसलिए हम काम को बंद करने के लिए मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि इन मरे हुए जानवरों को उठाने के लिए बकायदा नगरपालिका द्वारा वैध तरीके से टेंडर निकाला जाता है। लेकिन सरकारी तौर-तरीकों से काम करने के बावजूद भी गौरक्षकों का डर हर वक़्त बना रहता है और ऐसे माहौल में काम करना नमुमकिन हो गया है।

 

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