2018 में एच 1 बी वीज़ा अप्लाई करने वाले तीन-चौथाई भारतीय हैं: अमेरिकी रिपोर्ट

2018 में एच 1 बी वीज़ा अप्लाई करने वाले तीन-चौथाई भारतीय हैं: अमेरिकी रिपोर्ट
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अमेरिका जाने का ख्वाब देखने वाले भारतीयों के सपने को झटका लग सकता है। अमेरिकी सरकार एच-1बी वीजा की राह और अधिक कठिन करने वाली है। मौजूदा समय में अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के अधिकारी बड़ी संख्या में एच-1बी वीजा आवेदनों को रिजेक्ट कर रहे हैं। अधिकारी इन आवेदनों को नौकरी का ‘विशेष व्यवसायों’ न होने के आधार पर रिजेक्ट कर रहे हैं। यूएससीआईएस ने कहा है कि वह एच-1बी वीजा के लिए नए नियम लाने जा रही है, यदि ऐसा होता है तो एच-1बी वीजा की राह और भी कठिन हो जाएगी।

‘Strengthening the H-1B non-immigration visa classification program’ नाम के एक प्रपोजल से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका का गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ‘विशेष व्यवसाय’ की परिभाषा में बदलाव कर सकता है ताकि एच-1बी वीजा कार्यक्रम के माध्यम से बेहतर और प्रतिभाशाली विदेशी नागरिकों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।

इसके साथ ही इस प्रपोजल में ये भी संकेत दिए गए हैं कि अमेरिकी कामगारों और उनके वेतन-भत्तों के हितों को ध्यान में रखते हुए ‘रोजगार और नियोक्ता-कर्मचारी संबंध की परिभाषा’ को भी संशोधित करेगा। इस संबंध में जनवरी 2019 तक नया प्रस्ताव  लाया जा सकता है।

बता दें कि एच-1बी वीजा एक वर्किंग वीजा है जो प्रोफेशनल वर्कर को दिया जाता है। इस वीजा विशेष व्यवसाय को ध्यान में रखकर जारी किया जाता है, जो कम से कम स्नातक की डिग्री या फिर इसके बराबर की डिग्री की आवश्यकता होती है। एच-1बी वीजा भारतीय आईटी पेशेवरों के बीच खासा लोकप्रिय है। यह एक गैर-प्रवासी वीजा है जो कि अमरीकी कंपनियों को कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों की भर्ती की अनुमति देता है। प्रौद्योगिकी कंपनियां चीन और भारत जैसे देशों से कर्मचारियों की भर्ती करने के लिये इस वीजा पर निर्भर हैं।

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