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प्राचीन काल की एक प्रथा जो झारखंड में अब तक है जारी

रांची : झारखंड देश में सबसे रेअर स्थानों में से एक है, जहां प्राचीन काल के बाद से अब तक एक परंपरा जारी है जिसे मेगालिथ के नाम से जाना जाता है। पूरी दुनियां में सबसे पुराने मेगालिथ स्कॉटलैंड और इंग्लैंड में पाए गए हैं। झारखंड में वर्तमान में लगभग 32 जनजाति हैं, जिनमें से केवल चार लोग अज्ञात समय के बाद से अपने मृतक पर मेगालिथ पत्थर की बहुत पुरानी प्रथा जारी रखते हैं। इन में से कितने जनजातियों ने अतीत में मेगैलिथिक स्टाइल में अपने पुर्वजों को दफन किया था, यह स्पष्ट नहीं है। अतीत में कुछ अधिक महापाषाणु जनजातियां होनी चाहिए, जो आज विलुप्त हो गई हैं या शायद किसी अन्य महापाषाण समूह के साथ विलय हो या शायद महापाषाणु दफन करने की परंपरा छोड़ दिया हो।

हालांकि, लोकप्रिय मान्यताओं के विपरीत, सभी मेगालिथ्स मौत से जुड़े नहीं हैं। इनमें से कुछ स्मारकों विशेष अवसरों के लिए स्मरणोत्सव के रूप में कार्य किया जाता है या सीमा चिह्नकों के रूप में किया जाता है और कुछ को खगोलीय वेधशालाओं के रूप में भी कार्य किया जाता था।

मानव विकास के लिए मेगालिथ एक महत्वपूर्ण सुराग हैं। झारखंड में मेगालिथ की भरमार है। यहां चतरा, चाईबासा, रामगढ़, लोहरदगा, हजारीबाग, गुमला आदि जिलों के ग्रामीण इलाकों में पुराने मेगालिथ पाए गए हैं। सिल्ली के पास चोखाहातू में तो सात हजार से अधिक मेगालिथ हैं। 1872 में कर्नल डालटन ने इनकी गिनती करायी थी। इसका उल्लेख जर्नी ऑफ एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल पुस्तक में है। अभी भी 14 एकड़ से अधिक क्षेत्र में हजारों की संख्या में मेगालिथ मौजूद है। पुरातत्व और पर्यटन के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण बन गया है। अभी हाल ही में रांची के हेहल पहाड़ के पास जमुना नगर में सैकड़ों मेगालिथ पाए गए हैं। इसकी खोज पुरातत्वविद डा हरेन्द्र प्रसाद सिन्हा की टीम ने की थी।

क्या है मेगालिथ

पुराने समय में मृत्यू के बाद सामूहिक कब्रगाह में पत्थर गाड़ दिए जाते थे। उन्हें ही मेगालिथ कहा जाता है। ये मृत्यु के स्मृतिचिन्ह् हैं। देश में सबसे पुराने मेगालिथ 1800 बीसी के आसपास के हैं। यह जम्मूकश्मीर में पाए गए हैं। झारखंड में 300-400 बीसी के मेगालिथ मिले हैं। इसमे लोहरदगा के मेगालिथ सबसे पुराने दिखायी पड़ते हैं। चोखाहातू भी उन्हीं में से एक है। जबिक इंग्लैंड में 4000 साल पुराने मेगालिथ मिले हैं जो सबसे पुरानी है.

इंग्लैंड में एक मेगालिथिक स्मारक : जो शायद अनुष्ठान के प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किया गया था) को समय के साथ कई अलग-अलग जनजातियों द्वारा बनाया गया था।
इतिहासकारों के अनुसार इंग्लैंड स्टोनहेज (मेगालिथ पत्थर) सबसे प्रमुख प्रागैतिहासिक स्मारकों में से एक है सबसे मत्वपूर्ण रिंग ऑफ स्टोन्स है जो मेगालिथ पत्थर ही है कई अलग-अलग चरणों में बनायी गई थी, जिसमें लगभग 5000 साल पहले निओलिथिक ब्रिटन्स ने पूरा किया था, जो प्राचीन उपकरण का इस्तेमाल करते थे, जो संभवतः हिरण के सींग से बने औजार थे। गौरतलब है कि स्टोनहेज ब्रिटेन में सबसे प्रमुख प्रागैतिहासिक स्मारकों में से एक है। आधुनिक वैज्ञानिक अब व्यापक रूप से मानते हैं कि स्टोनहेज (इंग्लैंड में एक मेगालिथिक स्मारक जो शायद अनुष्ठान के प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किया गया था) को समय के साथ कई अलग-अलग जनजातियों द्वारा बनाया गया था। स्टोनहेज ब्रिटेन में सबसे प्रमुख प्रागैतिहासिक स्मारकों में से एक है। स्टोनहेज जिसे आज देखा जा सकता है अंतिम चरण है जो लगभग 3,500 साल पहले पूरा हुआ था।
रिंग ऑफ स्टोन्स : स्टोनहेज ब्रिटेन में सबसे प्रमुख प्रागैतिहासिक स्मारकों में से एक है
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