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एक जबरदस्त फ़ैसला जिसने भीड़ हिंसा के खिलाफ क़ानूनी लड़ाई में इतिहास रच दिया

29 जनवरी 2017 दोपहर मांस कारोबारी 45 साला अलीमुद्दीन अंसारी झारखंड में रामगढ़ जिला के ग्रीडीह कस्बे से जब अपनी मारुती वेन में निकले तो उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि यह उनका आखिरी सफर होगा।

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पश्चिम बंगाल के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली अलीमुद्दीन की मारुती वेन को दाईं बाजू की कई चरमपंथी संगठनों से संबंध रखने वाले लोगों के एक समूह ने रामगढ़ के मार्किट में रोका और दिन दहाड़े अलीमुद्दीन को पीट पीटकर मार डाला। हमलावरों को शक था कि अलीमुद्दीन अपनी गाड़ी में गौमास लेकर जा रहे हैं और यह उनका इतना बड़ा जुर्म ठहरा कि उन्हें सफाई देने का मौक़ा तक नहीं दिया गया।

अब अलीमुद्दीन अंसारी की हत्या के 11 आरोपियों को उम्रकैद की सज़ा पूरे देश के इंसाफ पसंद नागरिक इत्मिनान महसूस कर रहे हैं। अदालत ने जिन 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, उनमें 2 नाबालिग हैं। इसके अलावा सजा पाने वालों में BJP की रामगढ़ जिला इकाई के मीडिया प्रभारी नित्यानंद महतो का नाम भी शामिल है और बाकि के दोषी गौ रक्षा समिति से जुड़े हुए हैं।

इनमें दीपक मिश्रा, छोटू वर्मा व संतोष सिंह को मुख्य अभियुक्त करार दिया था। विक्की साव, सिकंदर राम, कपिल ठाकुर, रोहित ठाकुर, राजू कुमार, विक्रम प्रसाद व उत्तम राम को भी दोषी करार दिया गया था। महज आठ महीने 17 दिन में कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली थी।

इस केस के पैरवीकार शादाब अंसारी ने कहा कि अभियोजन पक्ष के वकील सुशील कुमार शुक्ला और सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ पुलिस ने काफी सहयोग किया खासकर एसपी ने खुद ही केस पर नज़र रखी।

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