Thursday , July 19 2018

ट्रम्प के फैसले के खिलाफ़ मुस्लिम देशों को एकजुट करने में एर्दोगन ने लगा दी है पुरी ताक़त

इस्तांबुल। यरूशलम पर अमेरिका की घोषणा के संबंध में तुर्की के नेता रजब तैयप एर्दोआन मुस्लिम देशों को एक स्वर में अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए एकजुट करने की कोशिश में हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि प्राय: असंगठित रहने वाले मुस्लिम राष्ट्रों को वे एक मंच पर ला सकेंगे या नहीं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के यरुशलम को इस्राइल की राजधानी की मान्यता देने से तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन का गुस्सा फूट पड़ा था। इसकी आधिकारिक घोषणा इस सप्ताह के शुरू में की गयी थी।

खुद को फलस्तीनी मामलों के समाधान की धुरी मानने वाले एर्दोआन ने तभी से इस धारणा का विरोध करना शुरू कर दिया था जब इस बारे में घोषणा भी नहीं की गई थी।

उन्होंने ट्रंप की इस घोषणा को ‘‘मुस्लिमों के लिये खतरे की घंटी ’’ बताया है, क्योंकि पूर्वी फलस्तीनी क्षेत्र के नागरिक इसे अपने देश की भविष्य की राजधानी के तौर पर देखते हैं।

ट्रम्प के ऐसी चेतावनियों की अवहेलना करने के बाद तुर्की के राष्ट्रपति ने इस्लामी सहयोग संगठन के मौजूदा अध्यक्ष की हैसियत से इस्लामिक समूहों का एक शिखर सम्मेलन आहूत किया।

ब्रिटिश आर्मीज सेंटर फॉर हिस्टोरिकल एनालिसिस एंड कन्फ्लिक्ट रिसर्च में रेजीडेंट फेलो जिया मेरल ने कहा, ‘‘वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया जुटाना चाहते हैं।’’ उन्होंने उल्लेख किया कि एर्दोआन ने मुस्लिम सहयोगियों एवं गैर-इस्लामी नेताओं से बात की थी।

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